तो 3 मई के बाद खुल जाएगा लॉकडाउन !

"मोदी सरकार अगर herd immunity के रास्ते पे चलती है तो वह lockdown खोल देगी। मरो और काम करो। देश के लिए कुछ "शहीद" हो जाएंगे। बाकी मौज काटेंगे।"

Nadim S. Akhter


मैं कोई टीआरपी बाज़ लेखक-पत्रकार नहीं कि ये कहूँ के #lockdown 3 मई के बाद खुलेगा या नहीं, ये जानने के लिए इतने बजे देखिये-सुनिए मुझे! 

दरअसल भाई लोगों को पता नहीं कि पब्लिक भी पल-पल की खबर रखती है। बस उसके पास किसी खबर की insight नहीं होती। अभी एक मित्र का फोन आया कि lockdown खुलेगा या नहीं, ज़रा बताइए। कुछ लिख दीजिए। फेसबुक पर तो नामी पत्रकार घड़ी गिना रहे हैं। खैर!


अब भाई lock down है बहुत संवेदनशील मामला। सच।पूछिए तो सरकार को भी समझ नहीं आ रहा कि क्या करें? #Economy की हालत पतली है और इधर #कोरोना के जून-जुलाई में सबसे ऊंचे स्तर पर रहने की भविष्यवाणी है। यानी इधर कुआं और उधर खाई। पहले से ही ज़मीन सूंघी अर्थव्यवस्था के लिए कोरोना ताबूत में आखिरी कील साबित हुई। हमारी अर्थव्यवस्था अब कब्र में है। कुछ समय बाद मेनस्ट्रीम मीडिया भी आपको यही बताएगा, मैं पहले बता रहा हूँ। बेरोज़गारी और कंगाली का दौर आ सकता है। आर्थिक आपातकाल भी लग सकता है, जिसमें बैंकों में पड़े नागरिक के पैसे राष्ट्र की संपत्ति हो जाती है।



तो इन हालात में आर्थिक मोर्चे पे ज्यादा चुनौती है। इतना लंबा lockdown चलने के बाद उसे फिर से जिंदा करना एक चुनौती है। कोरोना से लोग बाद में मरेंगे, पहले भूख से मर रहे हैं या मरने की कगार पे हैं। यही कारण है कि पीएम मोदी से हुई बातचीत में ज्यादातर राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने #लॉकडाउन खोलने की बात कही है। 

तो lockdown खुलेगा या नहीं? अगर खुल गया तो फिर कोरोना के केस और बढ़ेंगे। तो इसका क्या उपाय है सरकार के पास? है ना! भगवान भरोसे। मेरा मतलब है कोरोना भरोसे। विज्ञान में इसे #Herd #Immunity कहते हैं यानी भीड़ की इम्युनिटी। इसमें सब कुछ भगवान भरोसे होता है। यानी जनता को बीमारी/महामारी से जूझने और मरने के लिए खुला छोड़ दिया जाता है। जब करीब 70-80 फीसद आबादी उस महामारी से संक्रमित हो जाती है तो वो अपने आप इसके खिलाफ प्रतिरोधी क्षमता यानी इम्युनिटी बना लेती है। वैसे इस कवायद में काफी लोग मर जाते हैं। सो भारत में अगर इस कांसेप्ट को लागू किया गया तो कुछ करोड़ लोग तो इससे मरेंगे ही। बाकी बच जाएंगे और herd immunity विकसित कर लेंगे। उधर इकॉनमी भी चलती रहेगी। सरकार के दवा-दारू के भी पैसे बचेंगे। यानी आम के आम और गुठलियों के भी दाम। 



तो मोदी सरकार अगर herd immunity के रास्ते पे चलती है तो वह lockdown खोल देगी। मरो और काम करो। देश के लिए कुछ "शहीद" हो जाएंगे। बाकी मौज काटेंगे। वैसे सुना है कि इंग्लैंड ने अपने यहां herd immunity मॉडल को रिजेक्ट कर दिया है क्योंकि उनको अपने नागरिकों की जान बहुत प्यारी है। पर भारत में ये लागू हो सकता है। सीमा पर जवान जान दे रहे है, तुम कोरोना वायरस से देश के लिए नहीं मर सकते!! कैसे देशद्रोही हो बे? यही कहा जाएगा। IT CELL इस पे बहुत कुछ लिख और बना भी चुका होगा।

तो लब्बोलुबाब ये है कि 3 मई के बाद lockdown खुल सकता है। कुछ तथाकथित शर्तों के साथ, जिनका पालन तो होना नहीं है। भारत herd immunity मॉडल अपना सकता है। थाली पीटने वाले और मोमबत्ती जलाने वाले इसे सहर्ष स्वीकार करेंगे और देशहित में कोरोना से अब असल में लड़ेंगे। #infected होकर। फिर herd immunity विकसित करने के लिए वे जान दे देंगे। सच्चे देशभक्तों की परीक्षा की घड़ी आ गयी है। हमारे प्रधानमंत्री के अगले संबोधन का इंतज़ार कीजिए।


और हां ! घड़ी देखकर lockdown खुलने या नहीं खुलने का बताने वाले लोग मेरी इस पोस्ट से क्लू ले सकते हैं। मीडिया वाले भी अपनी वेबसाइट चमका सकते हैं। सर्वे संतु सुखिनः। मित्र का फोन आया तो मोबाइल की स्क्रीन इस रोज़े में गीली करनी पड़ी। क्या करें! भाई लोग अब फेसबुक पे भी खबर बेचने लगे हैं। इसीलिए आना पड़ा। धन्यवाद।

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