जब 6.5 लाख में सेडान कार मिले तो कोई हैचबैक क्यों ख़रीदे भला !

Nadim S. Akhter 16 November 2019


जब 6.5 लाख में #Honda #Amaze, सेडान कार (पेट्रोल) आ रही हो, तो कोई 5.5 लाख में नई #facelift #WagonR #CNG हैचबैक क्यों खरीदेगा??!!

और जब 5.5 #Lakh में #वैगनआर सीएनजी मिल रही हो तो कोई 6 लाख के ऊपर देकर नई वेशभूषा वाली #Hyundai #grand10 या इससे थोड़े कम दाम वाली #फेसलिफ्ट #ह्युंदै #Santro #Sportz या #magna model क्यों खरीदेगा? सैंट्रो वैसे भी चिपकी हुई कोरियाई गड्डी लगती है।


खेल ये भी है कि जब 6.12 लाख में एकदम नई लॉन्च हुई #BS6 इंजन के साथ #Renault#Triber मिल जाए, वो भी #seven #seater, तो कोई #five #सीटों वाली सैंट्रो या वैगन आर या फिर amaze पर क्यों नज़र डालें? #होंडा का ब्रैंड #name तो ठीक है पर उसका मेन्टेनेन्स भी महंगा है और पार्ट्स भी। 

#Kwid जो नए रूप में अभी #maruti #SPresso को टक्कर देने के लिए बाजार में आई है, वो तो और भी घटिया गाड़ी है। सिर्फ शोशेबाजी। और #मारुति ना घर की रही, ना घाट की। Spresso को कामयाब करने के लिए सुना है उसने अपनी सफल बजट कार #Alto का #production रोक दिया है। अब Spresso ना तो #MUV जैसी लगती है ना उसकी ताकत है किसी #एमयूवी के नज़दीक आने की। बस गाड़ी ऊंची है। हां, शुरुआती #response #पब्लिक ने इसको अच्छा दिया है। बस hype के चलते।


तो entry level भारतीय कार बाजार में लूट देखिए। सुरक्षा के नाम पे इनमें कुछ नहीं और क्रैश टेस्ट में इनको five star में से एक या दो स्टार ही मिले हैं। सिर्फ अमेज को शायद 4 स्टार की रेटिंग मिली है। सुना है कल ही मुम्बई में कोई मराठी गायिका अमरीका से भारत वापिस आयी और घर जाते समय उनकी कार किसी टैंकर से टकरा गई। उनकी मौके पे ही मौत हो गयी क्योंकि किसी टिन के डिब्बे वाली कार में वो जा रही होंगी। अगर मर्सेडीज़ या BMW पे हैं, तभी बच सकते हैं। वैसे महंगी कार में होने के बावजूद इंग्लैंड में प्रिंसेस डायना रोड एक्सीडेंट में मारी गयीं। क्या कहें! उन कारों के सामने तो भारत की कारें चलते-फिरते टिन के ताबूत हैं।

बाकी बजट कारों में अगर पेट्रोल का खर्चा उठा सकते हैं तो होंडा अमेज खरीदें। उसके बाद अगर सात आदमी के लिए कार चाहिए तो नई नवेली triber का कोई जोड़ नहीं। निसान की भी इसी बजट में एक सात यात्रियों वाली कार पहले से है पर दिक्कत ये है कि उसकी सेकण्ड और थर्ड रो की सीटें फिक्स्ड हैं। triber में ये खुल जाती हैं, जिससे ज़रूरत के मुताबिक आप अच्छा खासा बूट स्पेस बना सकते हैं। साथ ही triber में आपको सेकण्ड और थर्ड रो में भी AC की खिड़कियां मिलेंगी जो सिर्फ innova और बड़े बजट की कारों में मिलती हैं।


और अगर सस्ता, सुंदर टिकाऊ कार चाहिए जो बाइक के खर्च में आपकी कार दौड़ा दे तो नये डिजाइन के साथ लॉन्च हुई अपनी मारुति की wagon R ले लीजिए, सीएनजी वाली, जो करीब 1.5 रुपये में आपकी कार एक किलोमीटर भगा देगी। 


बहरहाल, इनोवा से लेकर fortuner तक, सब टिन के डब्बे हैं। अलग-अलग टेस्टिंग एजेंसियों के अलग पैमाने हैं। यूरोप वालों के सख्त हैं और एशिया वालों के हल्के। भारत में एशिया वालों की सस्ती ज़िन्दगी के हिसाब से रेटिंग का तमगा लिया जाता है। इस में भी इन्हें पांच में से दो स्टार मिलते हैं। सख्त मानक पे जांच लें तो एक भी सितारा नहीं मिलेगा। इन सभी गाड़ियों के ढांचे यानी स्टील की जुड़ाई और क्वालिटी घटिया है, जो ना तो एक्सीडेंट के झटके सोख सकते हैं और ना स्थिरता देते हैं। सबसे अहम है क्रैश टेस्ट क्योंकि आपकी जान कीमती है और इस पे ना सरकार ध्यान देती है और ना मुनाफा कमाने वाली कार कम्पनियां। अभी लटका-लटका के इस साल से तो इन्होंने ABS , एयर बैग्स और रियर सेंसर जैसी सुविधाएं mandatory की हैं वरना अब तक तो भारत की जनता जान हथेली पे लिए ही कार में घूम रही थी। आज भी वही खतरे हैं, क्रैश टेस्ट में सब फेल हैं पर इस खुशफहमी में रहिये कि एक्सीडेंट होने पे एयर बैग आपको बचा लेंगे। इसकी पोल पट्टी क्रैश टेस्ट ने खोल दी है।

#Maruti #Suzuki #Spresso #Honda #Amaze #Altok10 #Auto #India



Related Links (साभार)

1.  From BS4 to BS6: SC gives marginal relief to auto sector, allows sale of 10% unsold BS4 inventory after deadline



2. Lockdown: Auto makers go digital to sell BS-IV inventory 








Post a Comment

0 Comments