क्या एक साज़िश के तहत दुनिया पर छोड़ा गया कोरोना वायरस !!

Conspiracy Theory 

Nadim S. Akhter 25 March/16 May 2020


क्या #Covid19 यानी #कोरोना #वायरस एक साजिश का रिहर्सल टेस्ट है? क्या ये वो biologocal weapon है, जिसे टेस्ट के लिए दुनिया में छोड़ दिया गया कि virus किस-किस condition में survive करता है, कितनी तेजी से फैलता है और इंसानों तथा जानवरों के संपर्क में आने पर किस प्रकार react करता है यानी वायरस इंसानों के #WBC (श्वेत रक्त कणिकाओं) से किस तरह व किस हद तक लड़ पाता है। इस प्रक्रिया में वायरस, इंसानों के immune system यानी WBC से लड़ने के लिए अपना immune system कितना बदलता है और उसमें किस तरह के बदलाव आते हैं। यानी महीनों दुनिया और तमाम दवाओं से लड़ने के बाद जो वायरस बचे रह जाएंगे, उनका इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरोधी तंत्र क्या शुरुआत वाले वायरस के ही जैसा है या उसमें कुछ बदलाव हुआ, ये देखा जाएगा।


फिर ये भी देखा जाएगा कि दुनियाभर के वैज्ञानिक इस वायरस को खत्म करने के लिए कौन सी और कैसी दवा बनाते हैं। उसका chemical composition क्या है? वह दवा वायरस की किस कमज़ोर कड़ी पर वार करके उसे खत्म करता है? और उस दवा से लड़ने के लिए कोरोना वायरस अपने immune system में कैसे बदलाव करता है? फिर इस दवा के बनने में कितना वक्त लगता है? और सबसे बड़ी बात। इस वायरस के सम्पर्क में आने के बाद इंसानों के immune system में क्या बदलाव आते हैं? श्वेत रक्त कणिकाएं यानी हमारे खून में मौजूद WBC इस वायरस की कैसे इमेज अपनी मेमोरी में save करती हैं ताकि भविष्य में अगर ये फिर उस इंसानी शरीर पर हमला कर दे तो उससे निपटने के लिए WBC की रणनीति क्या होगी? बॉडी का इम्यून सिस्टम उस वायरस को मारने के लिए और कौन-कौन से एंजाइम और हॉर्मोन छोड़ेगा?


मतलब इतने सारे if and buts हैं कि आपका माथा चकरा जाएगा पर सवाल खत्म नहीं होंगे और ना ही इन सवालों के ढूंढे जाने वाले जवाब। कुछ वर्ष पहले जब फेसबुक पर मैंने Superbug यानी विशालकाय बैक्टीरिया के बारे में लिखा था तो biological weapon के खतरे से भी आगाह किया था। फिर जब चीन में कोरोना वायरस की आहट हुई तब भी मैंने शंका जताई थी कि कहीं ये कोई साजिश तो नहीं है? अमरीका की, चीन को तबाह करने की। पर अब लगता है कि ऐसा भी हो सकता है के चीन खुद कोई biological हथियार बना रहा हो, जिसमें किसी वायरस या बैक्टीरिया के जीनोम में फेरबदलकर उसे घातक बनाया जा सकता है। फिर इसे प्रयोगशाला में छोटे-छोटे जानवरों पे आजमाया जाता है। आखिर में जब एक संतोषजनक चीज़ बन जाती है यानी एक मोटा-मोटी घातक वायरस बन जाता है तो चीन जैसा तानाशाह देश उसे खुद अपनी जनता पे छोड़ सकता है कि देखें! इसके क्या परिणाम होते हैं और फिर दुनियाभर में ये कैसे फैलता है और क्या-क्या नुकसान पहुंचाता है? इसके बाद इसके आगे की चीज़ बनेगी यानी कोरोना-2, कोरोना-3 बनेगा, जो पहले वाला का upgraded version होगा और फिर ये अंदाज लगाने की कोशिश होगी कि अगर 50 लाख या एक करोड़ की आबादी पर इसे छोड़ दिया जाए तो कितने दिनों में ये पूरी आबादी को अपनी चपेट में ले लेगा, दवाओं का इसपर असर नहीं होगा, इंसान का गज़ब का immune system इसके सामने सरेंडर कर देगा ( जैसा घातक कोबरा के काटने पे होता है) और पूरी आबादी कितने दिनों तक साफ हो जाएगी? बिना युद्ध लड़े? बिना खून बहाए और बदनामी लिए कैसे किसी देश को गुलाम बनाया जा सकता है, तबाह किया जा सकता है, यही biological weapon का #USP है। 


तो क्या जो काम अब तक अमरीका नहीं कर पाया, वो चीन ने कर दिया? वैसे भी चीन super power बनने की ज्यादा जल्दी में है। वहां की तानाशाही व्यवस्था सरकार को कुछ भी करने की छूट देता है। उससे कोई सवाल नहीं कर सकता। सो कोरोना अभी शुरुआत है। आप ये जान लीजिए और ये बात शायद मीडिया में ना आए कि इस वक़्त दुनियाभर की खुफिया एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। कोरोना ने सबके कान खड़े कर दिए हैं। ये किसका दुस्साहस है, सब यही ढूंढ रहे होंगे। बस जनता को मीडिया के मार्फ़त ये बताया जाएगा कि चमगादड़ या फलां चीज़ खाने से ये वायरस इंसान के शरीर में आया। बहुत भोला तर्क है। अच्छा ये बताइए कि इंसान तो हजारों साल से तरह-तरह के जानवर खाता आ रहा है, चमगादड़ भी। फिर आज तक ये वायरस उसके शरीर में क्यों नहीं घुसा? ये एकदम नई प्रजाति का वायरस, जो पिछले SARS वायरस से मिलता जुलता है, 95 फीसद, वो कैसे पैदा हो गया? फिर तो टीवी की बीमारी के भी नए-नए बैक्टीरिया पैदा हो जाने चाहिए थे? हुए क्या? जो क़ुदरत को समझते हैं, वो मेरी बात जज़्ब कर पा रहे होंगे। 


बहुत दिनों से इन सब बातों पे मंथन कर रहा था पर लिखा नहीं क्योंकि कुछ चीज़ें बिना सबूत के नहीं बताई जानी चाहिए। लेकिन आज सोचा कि conspiracy theory में बांधकर इस पे फेसबुक पर लिखा जा सकता है। याद रखियेगा। ये षड्यंत्र वाली थ्योरी है और कुदरती रूप से मेरा दिमाग इसमें अव्वल है। तभी तो मेरे जीवन में आज तक जितने षड्यंत्रकारी आए, मुझसे पानी ही मांगा। मेरी छठी इन्द्रिय इसकी आहट और भनक ले लेती है क्योंकि मैं चीजों को flat सीधा सपाट नहीं देखता। उसको कई लेयर्स में देखता हूँ। आपकी कही एक बात मेरे दिमाग में कई तरीके से process होती है कि ये क्या कहा गया और क्यों कहा गया? इसकी कड़ी कहाँ-कहाँ जा रही है? मेरे अंतरंग मित्र कहते हैं कि मुझे खुफिया सेवा में होना चाहिए था क्योंकि मेरा दिमाग उसी तरह सोचता है। खैर! ये सब तो अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने वाली बात हो गयी। पर असल मुद्दा है कोरोना का लगातार दुनिया में फैलना और इस बीच ये खबर आना कि चीन ने कोरोना पर नियंत्रण कर लिया है और इसके लिए बनाए कई speciality hospital बंद कर दिए हैं। क्या वाकई? चीन के पास कोई जादू की छड़ी है कि इतनी जल्दी इतने बड़े पैमाने पर फैली बीमारी को कंट्रोल कर लिया!! क्या चीन सच बोल रहा है? चीन के राष्ट्रपति यानी मुखिया का चेहरा याद कीजिए, उसके हावभाव पढ़िए और फिर ये सोचिए कि ये आदमी कितना सच बोल सकता है? बोल सकता है क्या? चेहरा पढ़िए ज़रा। ये भी एक कला है। वो क्या गाना है कि किताबें बहुत सी पढ़ी होंगी तुमने, मगर कोई चेहरा भी तुमने पढ़ा है! फ़िल्म है बाज़ीगर।

फ़िलहाल तो अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को दी जाने वाली अपना मदद ये कहकर रोक दी है कि उसके मुखिया ट्रेड्रोस अधानोम ने जानबूझकर जानकारियाँ छुपाईं और चीन से निकली कोरोना महामारी पर दुनिया को गुमराह किया। जब वायरस दूसरे देशों में घुस गया, तब कहीं जाकर WHO ने मुंह खोला और तब तक काफी देर हो चुकी थी। इसके गंभीर मायने हैं और विशेषज्ञ कह रहे हैं कि अमेरिका और दुनिया के अन्य देश इस महामारी से निपटने के बाद WHO जैसे संगठन के रहने या ना रहने की प्रासंगिकता पर सवाल उठाकर इस पे ताला भी लगवा सकते हैं। टेड्रोस ने पूरी दुनिया के देशों का विश्वास खोया है, सो उनकी छुट्टी भी तय मानी जा रही है। 

उधर चीन का कहना है कि ये कोरोना वायरस अमेरिकी साज़िश भी हो सकती है। रूप चुपचाप ये सारा तमाशा देख रहा है और रुस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन चुपचाप सब देख रहे हैं। वैसे होने को कुछ भी हो सकता है और इस थ्योरी पर भी यक़ीन किया जा सकता है कि चीन को बदनाम करके उसे हमेशा के लिए दुनिया के नक़्शे में कुचल देने को ये साज़िश अमेरिका ने रची हो। एक ऐसा वायरस और बीमारी लाओ, जिससे चीन को बदनाम कर दो। जासूसी और षड्यंत्र की दुनिया में कुछ भी हो सकता है और आम लोगों को जो मीडिया में छपता दिखता है, वैसा दरअसल होता नहीं है। इस पर अलग से लिखूँगा। 

बहरहाल ये जाँच का विषय है कि कोरोना वायरस क्या वाक़ई लैब में बनाया गया या फिर कोरोना परिवार के दूसरे वायरस ही म्यूटेट होकर यानी कई जीवों से गुजरने के क्रम में अपना रूप बदलकर और जीनों के आदान-प्रदान द्वारा एक नए रूप में दुनिया के सामने आ गया। एक बिल्कुल नया स्ट्रेन, जिसे ना दुनिया ने कभी देखा था और सुना था और जिसे इंसान के शरीर का इम्यून सिस्टम पहचान नहीं पाता कि ये क्या चीज बदन में घुस गई और फिर वह वायरस इंसान को बीमार बना देता है। कई दफ़ा तो बेहद बीमार और जान चली जाती है।

जो भी हो, ये वक़्त जब गुजर जाएगा, तो कोरोना वायरस कहां पैदा हुआ, ये कैसे फैला और इसमें कौन-कौन लोग व देश दोषी रहे, ये सब जानकारी बाहर आएगी। इस पे शोध होंगे, खोजी रपटें लिखी जाएगी और दुनिया को अगली महामारी ले बचने के लिए आगाह किया जाएगा। तब तक इंतज़ार कीजिए कि कोरोना वायरस की वैक्सीन जल्द आ जाए। पर उसमें भी कई पेंच हैं। इन सब बिंदुओं पर विस्तार से अगली पोस्ट में।

धन्यवाद।


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