प्रधानमंत्री मोदी पर फिदा है भारत की जनता


नदीम एस. अख़्तर


#corona ने भारतीय राजनीति को गहरे प्रभावित किया है और मोदी जी को आश्वस्त किया है कि लाख संकट आएचाहे भूखे मरना पड़ेजनता उनका साथ नहीं छोड़ेगी। वह उन पे फिदा है। मोदी जी अब देश के सिर्फ पीएम नहीं रहेवह दक्षिण भारतीय फिल्मों के रजनीकांत बन गए हैं। जनता उनके कहने पे एक पैर पर नाचने को तैयार है "


मैं समाज की नब्ज़ जानने के लिए हमेशा सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता हूँ। सो वर्तमान दौर की रीडिंग ये है कि देश में #डायनमीडिया की वजह से ज़बरदस्त हिन्दू-मुसलमान हो चुका है। बहुसंख्यकक समुदाय में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए भयंकर ज़हर भर गया है। इसमें वे बहुसंख्यक भी शामिल हैं, जो कल तक उदारवादी और प्रगतिशील चेहरा लेकर सामने आते थे। अनेकानेक कारणों से और फेक न्यूज़ की जद में आने के चलते वे भी भरे बैठे हैं। ये एक निर्णायक प्रस्थान बिंदु है, जहां से भारत की राजनीति एकदम अलग दिशा में मुझे जाती दिख रही है। मतलब अगर आज चुनाव हो जाएं तो मोदी जी 2019 से भी ज्यादा लोकसभा सीटें जीत जाएं। यकीन करिए।




बस कुछ ही लोग दिख रहे हैं जो लगातार पत्रकार और नागरिक धर्म का पालन करते हुए सत्ता से सवाल कर रहे हैं। कोरोना संकट से निपटने के उपायों पर। और अन्य मुद्दों पर। बाकी पूरी पब्लिक बिछी हुई है। वे मजदूर भी, जो पैदल दिल्ली से घर को निकले थे, उन्हें सरकार से कोई दिक्कत नहीं। 2019 में इन्होंने ही वोट देकर सरकार बनवाई थी। बाकी मिडिल क्लास और एलीट क्लास वोट देने के चक्कर में लाइन में ज्यादा लगता नहीं। उनके हिस्से का वोट कोई और मार जाता है। #EVM के दौर में भी। अगर आपको ये नहीं पता तो आप बहुत भोले हैं।



लब्बोलुबाब ये है कि कोरोना से जंग हिंदुस्तान में हिन्दू-मुसलमान की जंग बनाई जा चुकी है, जिसका असर भविष्य के चुनावों पर पड़ेगा। साथ ही जो जनता यानी नॉन मुस्लिम अब तक #CAA और #NRC पर मुसलमानों के साथ थी, अब वह मुसलमानों के साथ नहीं खड़ी होगी। वह कहेगी कि ये देश की हर बीमारी के कारण हैं और दाढ़ी, पजामा और टोपी धारण करना अब इस देश में सेकंड भी नहीं, थर्ड क्लास सिटीजन होने की निशानी है जिनकी नागरिकता भी जल्द चली जायेगी। बस कोरोना के जाने का इंतज़ार करिए। और सुप्रीम कोर्ट से ज्यादा उम्मीद मत कीजिएगा, हिन्दू-मुसलमान दोनों क्योंकि बहुत महीन तरीके से कोर्ट भी अब रबर स्टाम्प की तरह काम करने लगा है। कुल मिलाकर #corona ने भारतीय राजनीति को गहरे प्रभावित किया है और मोदी जी को आश्वस्त किया है कि लाख संकट आए, चाहे भूखे मरना पड़े, जनता उनका साथ नहीं छोड़ेगी। वह उन पे फिदा है। मोदी जी अब देश के सिर्फ पीएम नहीं रहे, वह दक्षिण भारतीय फिल्मों के रजनीकांत बन गए हैं। जनता उनके कहने पे एक पैर पर नाचने को तैयार है।

सो 5 अप्रैल को देशभर में दीए का प्रकाशपर्व मनाया जाना अभूतपूर्व रूप से सफल होगा। ठीक वैसे ही, जैसे भगवान राम के अयोध्या आने पे रोशनी से नगरी नहा उठी थी। मोदी जी ने ये टेस्ट किया है कि lockdown की परेशानी झेलकर भी क्या जनता उनके साथ है? तो फेसबुक की नब्ज़ देखकर मैं कह सकता हूँ कि हां! बिल्कुल तन, मन और धन से। इतनी, जितनी मोदी जी ने भी नहीं सोचा होगा। विपक्ष अब एकदम साफ हो चुका है। वह 2019 के चुनाव वाली स्थिति में भी नहीं है। 




मोदी जी की ताकत जनता है। सो मुझे लगता है कि देश को अब बहुत कड़े फैसलों के लिए तैयार रहना चाहिए। बस कोरोना के थमने का इंतज़ार है। राह में सिर्फ एक रोड़ा है -सीएए। उस पे जंग होगी और धुकधुकी भी उसी पे है। दोनों तरफ। बाकी रास्ता हर जगह साफ है। मोदी जी की लोकप्रियता अब आप 5 अप्रैल को रात 9 बजे देखिएगा। ये उन्हें आश्वस्त करेगा कि अगर वो भारतीय करेंसी से महात्मा गांधी की फोटो हटाकर अपनी फोटो भी लगवा दें तो जनता ताली पीटेगी और स्वागत करेगी। देश बहुत बदल चुका है और इसमें #Jio के फ्री-सस्ता डेटा #whatsapp यूनिवर्सिटी का बहुत बड़ा योगदान है।
एक बात और। बतौर पत्रकार मैं हमेशा अपना काम नागरिकों की तरफ से सत्ता से सवाल पूछना समझता रहा हूँ पर आज मुझे लग रहा है कि नागरिक और प्रजा का भेद मिट सा रहा है। फिजां में एक अजीब सी मदहोशी है और देश का वश चले तो वह 20 करोड़ मुसलमानों को अभी के अभी detention centre में डाल दे। कटुता इतनी बढ़ गई है कोरोना काल में। एक बहुत बड़ा social transformatiom मुझे दिख रहा है। 

चाणक्य ने कहा था कि जब जनता, राजा के गुण-दोष पर ध्यान देना बंद करके उसे पूज्य मानने लगे तो बुद्धिमान व्यक्ति को वहां मौन धारण कर लेना चाहिए। सो मेरी एक पुरानी पारी आज यहां समाप्त होती है। अब हम भी दर्शक दीर्घा में बैठकर जनता को निहारेंगे।

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