सबकी पोल खोल रहा है सोशल मीडिया

  • Nadim S. Akhter


#facebook वो जगह है, जहां हर कोई #expose हो जाता है। आप अपने खोल में नहीं रह सकते। सत्य को सही और झूठ को गलत कहना सबके बूते की बात नहीं। यहाँ सापेक्ष और निरपेक्ष की भी बात नहीं। सच वो है, जिसे आप कहीं से भी देखें, दिखेगा वही। यहां आइंस्टीन की थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी काम नहीं करती। मसलन सूरज को अंतरिक्ष में कहीं से भी देख लीजिए, वह चमकता सितारा ही नज़र आएगा, ब्लैक होल नहीं बन जाएगा। 



आपकी निजी मजबूरियां हो सकती हैं, जो कुछ लोग झूठ के आडम्बर पर भी वाह-वाह करते दिख जाते हैं। वो मैं समझता हूँ, पर जिन लोगों के साथ ऐसी कोई मजबूरी नहीं, वे भी जब ढेंचूं-ढेंचूं करते दिखते हैं, तो समझ आता है कि दुनिया इसी का नाम है। एक साथ आप दो चरित्र नहीं हो सकते। या तो आप सत्य के साथ हैं, या फिर झूठ के संग। बीच में कोई ग्रे एरिया नहीं। जैसा मैंने अपनी पिछली पोस्ट में भी कहा था कि इस संसार में सिर्फ 2-3 फीसद लोग ही हैं, जो हर हाल में, हर मुश्किल सह के सत्य के साथ खड़े रहते हैं। इन्हीं में से कुछ लोग महापुरुष बनते हैं। बाकी 98 फीसद लोग कमज़ोर, निर्लज्ज और समझौते करने वाले होते हैं। जिन्हें सिर्फ अपनी और अपने स्वार्थों की चिंता रहती है। 

और ये दुनिया शुरू से ही ऐसी रही है। जाने कितने पैगम्बर और अवतार आए, पर ये नहीं बदले। सो अब भी नहीं बदलेंगे। बस सोशल मीडिया ने ये किया है कि सबको उघाड़ के रख दिया है। आप कितना भी बचने की कोशिश करो, असल चरित्र दिखा ही देते हो। और जैसा मैंने कहा कि एकसाथ आप दो चरित्र नहीं जी सकते। साधु का वेश धरे रावण को अपने असली रूप में आना ही पड़ता है। और सोशल मीडिया में वह लम्हा, वह सच्चाई कैद हो जाती है। 



ये पोस्ट हम सभी के लिए है। मेरे लिए भी। बस आप थोड़ी देर आंख बंद कीजिए और सोचिए कि जो आप कह-कर रहे हैं, क्या वह सही है? या आप स्वार्थवश ये सब कर रहे हैं। जो बुद्धिमान होता है, उसे सब भान होता है। बस वह अपनी गलतियों से मुंह चुराए रहता है। और जो जड़ मूर्ख होता है, उससे कोई उम्मीद ही नहीं। उसे भगवान ने ही ऐसा बनाया है। बुद्धि ही इतनी दी है, जिसका प्रयोग वह दुनिया को दिखाता रहता है। बस गनीमत ये है कि ये मानव सभ्यता है, सो ये बचे हुए हैं। अगर इसी बुद्धि का कोई हिरण या गैंडा जंगल में हो, तो शेर का शिकार होने से इन्हें इनका झुंड भी नहीं बचा सकता। 

#तकनीक का शुक्रिया, जो वह इंसान के अंदर दफन सिफत को बाहर लाकर पलट देती है। बस इस सिफत को पकड़ने की नज़र चाहिए। मेरे एक मित्र बार-बार कहते हैं कि वो सोशल मीडिया का इस्तेमाल एंटरटेनमेंट के लिए करते हैं। ये उनकी बुद्धि है। पर मैं सोशल मीडिया का इस्तेमाल एक सजग मानव के रूप में करता हूँ ताकि आपने आसपास को समझ सकूं और उनको पढ़ सकूं। जो वो हैं पर वो दिखना नहीं चाहते। आवरण से ढंके रहते हैं। #सोशल #मीडिया की जय!!

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