कोरोना तैयारियों का जायज़ा लेने की बजाय अंताक्षरी क्यों खेला रहा है मीडिया ?

Nadim S. Akhter


#TV #न्यूज #मीडिया का मानसिक दीवालियापन देखिए कि #घरबन्दी यानी #LockDown में वह मनोरंजन पेश कर रहा है। एंकर बहुत चटखारे लेकर कह रही है कि अंताक्षरी खिलवाएँगे, time pass करवाएंगे और गाना चल रहा है कि -बाहर से कोई अंदर ना जा सके, हम तुम एक कमरे में बंद हों....


कितने शर्म की बात है। पूरी दुनिया #Corona की महामारी से तबाह है। कल इटली में एक ही दिन में हज़ार से ज्यादा मौतें हुई। दुनियाभर के देश में बीमारों की तादाद बढ़ती जा रही है। भारत में ही कल एक दिन में 100 से ज्यादा मामले सामने आए। लाखों बेघर मज़दूर पैदल ही अपने-अपने गाँव चल पड़े हैं, भूखे प्यासे। पुलिस के डंडे खा रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे और बूढ़ी माएँ। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि हम कोरोना के स्टेज-3 में आ चुके हैं यानी हज़ारों मौतें भारत में भी होंगी। भले ही सरकार अभी ये बात आप से छुपा रही है लेकिन जब इटली की तरह यहां भी लाशें गिरने लगेंगी तो यही अंताक्षरी खिलाने वाले भौंडे एंकर लाशों पे भी #TRP ढूंढने लगेंगे। भारत का टीभी न्यूज़ मीडिया, हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों, अपने पतन के चरमकाल में है। कोरोना जैसा अभूतपूर्व संकट सामने है और ये जड़ बुद्धि, बेशर्म, बेगैरत और पत्रकारिता पे कलंक के समान लोग टीभी पे टाइम पास करवा रहे हैं। न्यूज़ की जगह तमाशा दिखा रहे हैं। कितना गिर गए हैं हम लोग!! घिन आती है अब तो।


इनको कायदे से ये दिखाना बताना चाहिए था कि लाखों बेघर लोग जो सड़क पे हैं, उनको राहत कैसे पहुंचाई जाए! अभी कोरोना पे मौतों का सिलसिला जैसे शुरू होगा तो देश में वेन्टीलेटर्स के लिए हाहाकार मचेगा। कितने वेन्टीलेटर्स हैं हमारे पास? नहीं हैं। अमरीका जैसे विकसित देश और यूरोप में इसके लिए हाहाकार है। भारत तो collapse कर जाएगा और जनता बेमौत मरेगी। ये सरकार से नहीं पूछ रहे कि इस बारे में आपकी क्या तैयारी है? देश का हाल नहीं बता रहे। पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं का क्या हाल है, राज्यवार रिपोर्ट कहीं नहीं है। 

न्यूज़ चैनल वाले आपको ये नहीं बता रहे कि जब दुनिया कोरोना से कांप रही थी और भारत तक ये बीमारी नहीं पहुंची थी, तब सरकार सोई हुई क्यों थी? क्यों नहीं #एयरपोर्ट पे ही स्क्रीनिंग करके लोगों को #quarantine किया गया। इनको देश में क्यों घुसने दिया गया, जिसका नतीजा आज ये है कि 1 अरब, 30 करोड़ जनता को सरकर ने घरों में ही नज़रबन्द कर दिया है। करीब 50 करोड़ से ऊपर की गरीब आबादी आज भूखे मरने की कगार पे हैं। उनके पास पैसे नहीं हैं। और जिनके पास पैसे हैं, उन्हें भी रोज़मर्रा की ज़रूरत का सामान नहीं मिल रहा। पूरे देश को पुलिस राज के हवाले कर दिया गया है और वह सब्ज़ी दूध के ट्रक भी नहीं चलने दे रही। 


अब तो विशेषज्ञ भी ये कह रहे हैं कि घरबन्दी से ज्यादा लाभ नहीं होने वाला क्योंकि जो लोग वायरस लेकर छुपे बैठे हैं, वो अपने आसपास इसको बांट रहे हैं। घर में ही जिनके साथ हैं, उनको भी और पड़ोसियों को भी। आप मान लीजिए कि स्थिति सरकार के #control से बाहर निकल चुकी है और जून-जुलाई तक देश में कोरोना एकदम अपने #peak यानी चरम पर होगा। ऐसा विशेषज्ञ कह रहे हैं। तब कितने लोग रोज़ाना मरेंगे, आपको अंदाजा नहीं क्योंकि भारत एक घनी आबादी और सामाजिक जीवन वाला देश है। सरकार को भी ये बात अच्छे से पता है पर वह शुतुरमुर्ग बनकर बालू में मुंडी गाड़े हुए है। दरअसल उसे समझ नहीं आ रहा कि अब क्या करें! सब कुछ मोदी जी के चेहरे और पब्लिक अपील के भरोसे छोड़ दिया गया है। देश घनघोर संकट में है पर यहां का टीभी न्यूज़ मीडिया हंसी मजाक और तमाशे में लगा है। 

ऐसे विपदा के वक़्त भी इतनी बेशर्मी और संवेदनहीनता कचोटती है। वो भी तब्ज़ जब ज्यादातर हिंदी न्यूज़ चैनलों के संपादक छोटे-छोटे शहरों से आये हैं और कुछ साल पहले तक लाखों की सैलरी कमाने की बजाय वे भी आम आदमी थी और न्यूज़ रूम की फैक्ट्री का एक साधारण पुर्जा। फिर भी ये संवेदनहीनता!! ऐसे वक्त में मुझे दिवंगत पत्रकार एसपी सिंह की बहुत याद आती है। वे टीभी न्यूज़ मीडिया का इस्तेमाल उन #powerful #visuals के लिए करते थे वह कहानी बताते थे कि सरकार की कान पे तमाचा पड़ता था। पब्लिक बिस्तर से उठकर बैठ जाती थी। वो #आजतक की शुरुआत थी और यह 20 मिनट का बुलेटिन #DD पर आता था। 


तब से अब तक टीभी न्यूज़ मीडिया ने तकनीक के मामले में जितनी तरक्की की, #content के मामले में वह उतना ही गरीब होता चला गया। टीभी न्यूज़ तमाशा, प्रोपगंडा और #TRP तक सिमट गया। एंकर सेलिब्रिटी बन गए और पत्रकार #producer. ज़ाहिर है जब सब कुछ प्रोड्यूस ही होना है तब संपादक, मैनेजर बन गया। #floor #मैनेजर। अब टीभी पे सबकुछ #event है। #light, #camera and #action. इससे ज्यादा कुछ नहीं। टीभी न्यूज़ रूम का मंत्र अब जनता को educate और #inform करने की बजाय entertain करना हो गया है। ऊपर से रही सही कसर सत्ता ने पूरी कर दी, जिसने सभी न्यूज़ मीडिया के मालिकों की गर्दन पकड़ ली। कि बोल बेटा! उड़ेगा ज्यादा कि अभी गर्दन मरोडूँ? फलस्वरूप 99 फीसद ने surrender कर दिया और टीभी पे #editorial की जगह #advertorial ने ले ली। 

इसलिए आज जब कोरोना पे भी न्यूज़ चैनलों के संपादक #टीआरपी ढूंढ रहे हैं और पब्लिक को खबर बताने की बजाय अंताक्षरी से लुभाने की कोशिश है तो एक सवाल मेरे मन में भी आता है कि हे ज्ञानेश्वराधीश!!! अगर मुझे मनोरंजन ही देखना होगा तो कपिल शर्मा का शो नहीं देखूंगा, netflix पे नहीं जाऊंगा! न्यूज़ चैनल क्यों देखूंगा ख़बरपति???!! बताओ!!! कोरोना संकट ने एक बार फिर भारतीय टीभी न्यूज़ मीडिया का भौंडापन, इनकी संवेदनहीनता और इनका छिछलापन उजागर किया है। ये इतिहास में दर्ज होगा कि जब देश कोरोना महामारी से जूझ रहा था तो इस देश के न्यूज़ चैनल अन्तरक्षरी खिलवा रहे थे और संपादक टीआरपी की जंग लड़ रहे थे। उनके मालिक खामोश होकर ये तमाशा देख रहे थे और पब्लिक बेबस थी। सरकार की तरफ से भी और मीडिया की तरफ से भी। उसे सिर्फ भगवान का आसरा था।



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