कोरोना से लड़ने का बस दिखावा है, असल इच्छाशक्ति दूर-दूर तक नहीं दिखती

Nadim S. Akhter 20 March 2020



थाली और ताली बजाने वालों को ये जानकर बहुत बुरा लगेगा कि भारत तेज़ी से #CoronaVirusके स्टेज-3 की तरफ बढ़ रहा है। ये भी हो सकता है कि हम already stage-3 पर आ गए हैं पर हमें पता ही नहीं क्योंकि सरकार आबादी से उतने सैंपल टेस्ट ही नहीं करवा रही, जिसकी ज़रूरत है। मतलब हम अभी एकदम अंधेरे में हैं कि देश अभी किस स्थिति में है और मेरा व्यक्तिगत आंकलन है कि स्थिति विस्फोटक है। #Panic क्रिएट नहीं कर रहा, चेता रहा हूँ कि जितना हो सके, उतना #social #distancing बनाकर रखिये क्योंकि आपको पता ही नहीं कि कौन-कौन ये वायरस लेकर घूम रहा है।



समझाता हूँ कैसे। स्टेज-2 का मतलब ये होता है कि सिर्फ उन्हीं लोगों को ये वायरस संक्रमित करता है जो विदेशों से ये बीमारी लेकर आए हैं या पता है कि फलां को ये बीमारी है और उसके संपर्क में कितने लोग आए हैं। ये एक पूरी निश्चित चेन होती है और उन सभी लोगों को धरकर अलग-थलग कर दिया जाता है ताकि पूरे समाज में ये बीमारी ना फैले। यहां बीमारी की रोकथाम आसान होती है।

लेकिन stage-3 खतरनाक है। ये महामारी का वो पड़ाव होता है जब एक अनिश्चित पैटर्न में ये बीमारी समाज के लोगों को अपनी गिरफ्त में लेने लगती है और ये पता लगाना मुश्किल होता है कि फलां आदमी को इस वायरस का अटैक किसके संपर्क में आने से हुआ? यानी उसे पता ही नहीं चलता कि राह चलते, दफ्तर, रिश्तेदारी या फिर बाजार में कहां से वायरस उसके शरीर में घुस गया। और साफ है तब सरकार के हाथ-पांव फूल जाते हैं और बीमारी को रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है। बस समझ लीजिए कि ये एक धुआंधार कारपेट बॉम्बिंग की तरह होता है। 

सो भारत अगर stage-3 में है या इस ओर खतरनाक रफ्तार से बढ़ रहा है तो फिर ऊपर वाले से दुआ कीजिये क्योंकि हमारे पीएम थाली और ताली पिटवाकर इस बीमारी को रोकने के लिए दृढ़ संकल्प हैं। हालात कितने खराब हैं, इसका अंदाज़ा आप लोगों को नहीं। डॉक्टर्स तक को सरकार मास्क नहीं दे पा रही, जो दिनभर में सैकड़ों मरीजों और उनके रिश्तेदारों के संपर्क में आते हैं। वे अपने पैसे से मास्क खरीदकर हॉस्पिटल जा रहे हैं और डरे हुए हैं। मेरे लखनऊ में एक करीबी मित्र हैं। #Eye #Surgeon हैं सरकारी अस्पताल में। आज सुबह उनसे बात हुई और कोरोना वायरस के जीनोम के बारे में उनसे डिस्कस किया कि जैसा मैं सोच रहा हूँ, क्या सही सोच रहा हूँ कि ऐसा हो सकता है! खबर ये आयी थी कि #कोरोना19 लैब में तैयार नहीं हो सकता, कुदरती रूप से विकसित हुआ विषाणु यानी वायरस है। पर इस नतीजे पर मुझे ऐतराज़ है। इसी बारे में उनसे बात कर रहा था तो उन्होंने कहा कि आप जैसा सोच रहे हैं, वैसा बिल्कुल हो सकता है। वो क्या बात है, उस पे दूसरी पोस्ट लिखूंगा पर यहां बात कोरोना वायरस के stage-3 पर हो रही थी। बातचीत में उन्होंने बताया कि यहां अस्पताल में सरकार डॉक्टर्स को मास्क तक नहीं दे पा रही। एक उनके हिस्से का आया था, जो मिला नहीं। ऊपर से 12 घण्टे की ड्यूटी होती है और हर 6 घण्टे में मास्क बदलना पड़ता है।तब हमने पूछा कि कैसे आप काम कर रहे हैं? उन्होंने बताया कि बस किसी तरह जान बचाए हुए हैं और खुद के पैसे से मास्क खरीदकर पहन रहे हैं। 


सुबह उनसे बात हुई और दिन में खबर आ गयी कि लखनऊ में शोर-शराबा पार्टी करने पहुंचीं गायिका कनिका कपूर वहां 100 से ज्यादा लोगों को ये वायरस बांट आयी हैं। वह लन्दन से ये वायरस देश के लिए गिफ्ट लायी थीं। लखनऊ वालों को दे आईं। थोक के भाव में। अब ये 100 हज़ारों में ये बीमारी बांटेंगे यानी मामला पूरा stage-3 तक जा रहा है, जो मुझे लगता है। सिर्फ लखनऊ में नहीं, देशभर ऐसे हालात हो सकते हैं क्योंकि भारत में जांच सिर्फ उनकी हो रही है, जहां शक हो रहा है। और stage-3 तक अगर मामला पहुंच रहा है तो ये बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है। इटली ने यही गलती की जिस वजह से वहां मौतें ज्यादा हुई। चीन और कोरिया ने बड़ा दिल दिखाया, आबादी के एक बड़े सैंपल की जांच करता गया और पॉजिटिव केसेज को अलग-थलग करता गया। इसका फायदा ये हुआ कि उन्होंने कारहर तरीके से बीमारी को कण्ट्रोल कर लिया। 

सच पूछिए तो भारत में इस बीमारी से लड़ने की इच्छा शक्ति ही नज़र नहीं आती। ना एयरपोर्ट्स पर निगरानी के अच्छे इंतज़ाम हैं, ना कोरोना जांच केंद्रों की समुचित व्यवस्था, ना अस्पताल में पर्याप्त बेड और isolation wards. चीन ने महज़ कुछ दिनों में अस्पताल बना दिया, सिर्फ कोरोना से लड़ने के लिए। यूरोप के देश, अमरीका और कनाडा जैसे राष्ट्रों में सरकार बड़ी-बड़ी रकम इस बीमारी से लड़ने और लोगों को आर्थिक सहायता देने के लिए निकाल रहे हैं। उद्योग जगत सैनिटाइजर और मास्क उपलब्ध करवा रहा है। लेकिन लेकिन

भारत में इस बीमारी से लड़ने का क्या इंतज़ाम है? अभी तक इसके लिए किसी consolidated fund का ऐलान मैंने तो नहीं सुना। पीएम टीभी पर आते हैं और भावनात्मक अपील करते हैं। मुझे इतने दिन दे दो! अरे सर! पूरा साल आपका है, पहले ये तो बताइए कि सरकार क्या कर रही है? थाली पीटने और शोर मचाने से जंगली हाथी की तरह अगर कोरोना वायरस भी भाग जाएगा तो मैं बड़ा वाला ड्रम छत पे खड़ा होकर बजाऊंगा। क्या इससे कोरोना भाग जाएगा? नहीं ना! फिर देश को भुलावे में क्यों रखते हैं? विदेश की भौंडी नकल क्यों करते हैं? वे अपने डॉक्टर्स के सम्मान में ताली बजा रहे थे और आप अपने डॉक्टर्स को अस्पताल में बेसिक मास्क तक नहीं दे पा रहे। किस चीज़ की तुलना करते हैं आप? अच्छा चलिए ये बता दीजिए कि इतने तामझाम और सरकारी तैयारी के बावजूद कनिका कपूर कोरोना वायरस लेकर एयरपोर्ट से कैसे बाहर निकली? उसे वहीं क्यों नहीं डिटेक्ट किया गया? क्या इंतज़ाम हैं आपके पास? कनिका तो सेलिब्रिटी हैं, पता चल गया। पता नहीं ऐसे कितने आम लोग होंगे जो विदेश से ये बीमारी इसी तह लेकर देश में बांट रहे होंगे। 

सच पूछिए मित्रों तो मुझे पूरे तालाब में ही भांग मिली लगती है। पीएम के थाली पीटने के आह्वान की आलोचना कर दी तो भक्तगण कांग्रेस के नेता से इसकी तुलना करने लगे। बेसिर पैर। उनको जवाब दे सकता था पर कीचड़ में पत्थर क्या मारना! वहां कमल ही खिला रहे तो अच्छा। जिनकी बुद्धि भ्रष्ट हो गयी हो और जिनको देशहित से ऊपर पार्टी निष्ठा लगने लगे, उनके बारे में क्या कहें! उन्हें उनके हाल पे छोड़ दीजिए। ईसा मसीह की तरह ये कहिए कि ये नहीं जानते ये देश के साथ क्या कर रहे हैं।


देश घोर मुसीबत में है। पूरी दुनिया संकट में है। बेहतर हो कि ताली और थाली पीटने के सरकारी ऐलान के चक्कर में ना पड़कर आप अपनी सुरक्षा खुद करें। मास्क खरीदें, लगातार बदलते रहें, सैनिटाइजर का खूब इस्तेमाल करें। और सबसे बड़ी बात। खुद को सामाजिक रूप से यथासंभव अलग-थलग रखें। पिकनिक और काम को लगाम दें। ज्यादा घूमने और यायावरी का शौक चर्राया हो तो तुरन्त उसपर पानी डालें। भारत के नागरिक अपने शरीर और स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए खुद ज़िम्मेदार हैं। सरकार से कोई अपेक्षा ना रखें। ताली और थाली भी तभी पीट पाओगे जब बीमार नहीं पड़ोगे। उसके लिए मास्क और सैनिटाइजर की ज़रूरत होती है, जिसे फ्री देने का सरकार ने कोई वादा नहीं किया है। हां! ताली पीटकर आप देशभक्ति का प्रदर्शन कर सकते हैं, अगर वायरस से बच गए तो!!

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