दीया जलाने से पहले डॉक्टरों से भी तो पूछिए, आपके पास मास्क है ना !

" क्या आपको पता है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 84 हज़ार लोगों पर सिर्फ एक आइसोलेशन बेड है जहां कोरोना के मरीज़ को रखा जा सकता है!! ये डराने वाला आंकड़ा है। स्थिति कितनी खराब है, ये इससे समझ सकते हैं कि 36 हज़ार भारतीयों के लिए मात्र एक क्वारेंटिन बेड है। कोढ़ में खाज का अंदाज़ा आपको इस बात से लग जाएगा कि 1 अरब, 30 करोड़ हिंदुस्तानियों को बचाने के लिए हमारे पास सिर्फ 30 हज़ार वेंटिलेटर हैं "

Nadim S. Akhter 23 March 2020


मेरे कुछ अजीज़ों ने भी घंटी, ताली, शंख और थाली बजाई। उनको #SocialMedia पे देखा पर टोका नहीं। उनकी भावना का सम्मान है। 



पर मेरा नज़रिया अलग है। मैं डॉक्टर्स के लिए ताली बजाने से पहले उनसे ये पूछूँगा कि आप ठीक तो हैं ना? मास्क, सैनिटाइजर और कोरोना से सुरक्षा वाले स्पेशल कपड़े तो मिल रहे हैं ना आपको? आपके हाथ में कोरोना से जंग से लड़ने वाले ये सब हथियार हैं या नंगे पांव और खाली हाथ ही आपको सरकार/सिस्टम ने लड़ाई के मैदान में उतार दिया है? 

यही बात मैं मीडियाकर्मियों समेत तमाम कोरोना कर्मयोगियों से पूछूँगा, जिनके लिए ताली-थाली बजाने का आह्वान था। अगर वे ज़िंदा बचेंगे, तभी तो दूसरों की सेवा कर पाएंगे! हवाई जहाज़ में भी take off से पहले ये घोषणा होती है कि अगर ऊपर ऑक्सीजन का लेवल कम हुआ तो सबसे पहले ऑक्सीजन की कृत्रिम सप्लाई वाला मास्क खुद पहनें। फिर दूसरों को पहनाएं क्योंकि आप बचे रहेंगे, तभी दूसरों की मदद कर पाएंगे।


ये घोर क्षोभ, पीड़ा और दुख की बात है कि हमारी सरकारों ने डॉक्टर्स को कोरोना से लड़ने के लिए नंगे बदन मैदान में उतार दिया है। उनके पास कपड़े, मास्क नहीं हैं। जैसा कि अपनी पिछली पोस्ट में लिखा था कि लखनऊ में एक सरकारी डॉक्टर मित्र को मास्क तक नहीं मिला। 12 घण्टे की ड्यूटी करते हैं और 6-6 घण्टे में खुद के पैसे से मास्क खरीदकर रोज़ बदलते हैं। बहुत दुखी थे। कह रहे थे कि हम जंगल की आग में उतरकर काम कर रहे हैं पर सरकार सुविधा नहीं दे रही। ये यूपी की राजधानी लखनऊ का हाल है, जहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी डॉक्टर्स कर्मयोगी का मनोबल बढ़ाने के लिए कल मोटा थाल लकड़ी से पीट रहे थे। सोचिए कितनी निर्लज्जता और दोमुंहापन है हमारी सरकारों और नेताओं की कथनी-करनी में! 

क्या आपको पता है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 84 हज़ार लोगों पर सिर्फ एक आइसोलेशन बेड है जहां कोरोना के मरीज़ को रखा जा सकता है!! ये डराने वाला आंकड़ा है। स्थिति कितनी खराब है, ये इससे समझ सकते हैं कि 36 हज़ार भारतीयों के लिए मात्र एक क्वारेंटिन बेड है। कोढ़ में खाज का अंदाज़ा आपको इस बात से लग जाएगा कि 1 अरब, 30 करोड़ हिंदुस्तानियों को बचाने के लिए हमारे पास सिर्फ 30 हज़ार वेंटिलेटर हैं। सोचिए कि जब कोरोना हमारे यहां #community #transmission यानी #स्टेज-3 में पहुंचेगा तो लाखों केस होंगे। तब ये वेन्टीलेटर्स ऊंट के मुंह में जीरा साबित होंगे। पूरी दुनिया में सरकारें अनुमान लगाकर आबादी के हिसाब से वेंटिलेटर बनवा रही हैं और भारत में सिर्फ 1200 नए वेंटिलेटर्स का ऑर्डर दिया गया है। यानी नंगा नहाएगा क्या और निचोड़ेगा क्या? सोचिए कि आबादी के हिसाब से भारत में लाखों वेंटिलेटर्स होने चाहिए थे मगर आधे लाख से भी कम हैं। फिर भी हम थाली बजा रहे हैं। किसके लिए? मनोबल बढ़ाने के लिए? अरे, जो काम कर रहे हैं और जो बीमार पड़ेंगे, उनका मनोबल सिस्टम ने तो पहले ही चूर-चूर कर दिया है। बहुत ही शर्मनाक और दुखद स्थिति है पर पब्लिक मस्त है। वह ढोल और थाली पीटकर डॉक्टर्स का मनोबल बढ़ाने का स्वांग करती है और फिर जुलूस-भीड़ की शक्ल लेकर #social #distancing की ऐसी तैसी कर देती है। कुछ लोग इसे हिन्दू बनाम मुसलमान का रंग देने लग जाते हैं। एक दक्षिणपंथी पत्रिका कोरोना और मुसलमान पे लेख छापती है। वहां भी मेरे मित्र काम करते हैं पर वे क्या करेंगे? आदेश ऊपर से जो है!


देश में हालात कितने खतरनाक हैं, इसका ऐलान शायद कल यानी मंगलवार को हो जाए। सरकारी व्यवस्था कल बताने जा रही है कि कोरोना हमारे देश में कम्युनिटी ट्रांसफर यानी स्टेज-3 पर पहुंच गया है या नहीं। उनकी आंख हमेशा देर से खुलती है। पूरी दुनिया के विशेषज्ञ कह रहे हैं कि भारत कोरोना बीमारी अगला #epicentre बनने जा रहा है पर यहां थाली पीटकर जश्न हो रहा है। सरकार ने रेलवे को बंद करने में भी देरी की। महाराष्ट्र में कोरोना के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं और वहां से ट्रेन में ठूंस ठूंसकर ना जाने कितने infected लोग अब तक यूपी, बिहार, बंगाल और अन्य राज्यों को लौट चुके हैं। यानी बीमारी बांटने के जिंदा बम हर जगह पहुंच चुके हैं। बस सरकारी ऐलान का इन्तेज़ार कीजिए कि भारत कोरोना के stage-3 में पहुंच चुका है, जो खतरनाक माना जाता है। और अगर सरकार ने आंकड़े छुपाने की कोशिश की तो ये स्थिति और विस्फोटक होगी क्योंकि तब ना ज्यादा कड़ाई होगी और ना ज्यादा बचाव के तरीकों का इस्तेमाल। फिर जनता तो मूर्ख है ही। सो बीमारी जमकर बांटेगी। 

मेरा काम है आपको सच्चाई बताना और आगाह करना। जान आपकी है, सरकार हम सब की और बीमारी विदेशी। सरकार और जनता अब भी चेत जाएं तो अच्छा वरना भारत में जनसंख्या नियंत्रण का काम अकेले सूक्ष्म कोरोना वायरस करने में सक्षम है। थाली और ताली से बाहर निकलिए और कुछ ठोस उपाय करिए। ये वायरस भक्तों, राजनेताओं, अमीर, गरीब और आम जनता में कोई भेदभाव नहीं करता। सबको बराबर एक समान, पूरे समाजवादी तरीके से बीमारी का प्रसाद देता है। 

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