हम तो रमज़ान ही कहेंगे, आप रमादान बोलिए

  • Nadim S. Akhter


भाई लोग इसी बहस में उलझे हैं कि 

रमज़ान कहें या
रमादान/रामादान/ रामाधान
सलाह कहें कि 
अस-सलाह या
अस्सलावात या
फिर नमाज़?
खुदा हाफ़िज़ कहें कि
अल्लाह हाफ़िज़?



अरे भाई! हिंदुस्तान में रहते हो। Station को टेशन बोलते हो, rickshaw को रेक्सा और train को टिरेन। फिर ये जान-धान-गुमान क्या लगा रखा है? जो बोलना है, बोलिए। रमज़ान बोलते आए हैं, तो यही बोलिए। वेस्ट इंडीज़ वाला राहुल ड्रेविड को राहोउल द्रेविद ही बोलेगा ना? कि तुम्हारी ज़बान से मिलाने के लिए अपनी जीभ को ऐंठकर जख्मी कर लेगा?

कमाल लोग हो यार! "भगवान/सर्वशक्तिमान हाफिज" ही बोल दोगे तो अल्लाह की जात बदल जाएगी क्या? फिर तुम तो नुक़्ता भी लगाते हो। बल्लेबाज नहीं, बल्लेबाज़ बोलो। काहे बोलें? हम तो bat-man बोलेंगे। बचपन में यही बोलते थे, जब किरकिट खेलते थे। 




इसलिए जादा नुक़्ते -उक्ते और तलफ़्फ़ुज़ के चक्कर में ना पड़ो। और ना हिंदी-अरबी-फारसी और इंग्लिश के। जो बोलते आए हो बोलो। मेसेज कम्युनिकेट होना चाहिए। सामने वाले को समझ आना चाहिए। बस। रमज़ान में जान बसती थी, तो ये रमादान कहां से आ गया बे? कौवा चले हंस की चाल। फिर जाओ सऊदी अरब और खालिस अरबी छांटो वहां। अरबी में एक लाइन बोल तो पाओगे नहीं और चले हैं रमज़ान-रमदान का अंतर सिखाने और अल्लाह-खुदा का फर्क समझाने। नुक़्ते से खुदा से जुदा हो जाता है, कभी लिख के देखा और समझा भी कि खली कहावत ही दोहराते रहते हो! 

रमज़ान का महीना है, हमको रोज़ा लग गया है, इसलिए ज्यादा दिमाग मत घुमाओ। इबादत करो इबादत। इतना ही कर लोगे तो बेड़ा पार हो जाएगा। और अरबी छांटना है, तो जाके पहले पूरी अरबी ज़ुबान सीखो। तब नमाज़ और सलाह का अंतर समझाना। समझे!!



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