वायरस और एंटीबॉडी की लड़ाई होती बहुत दिलचस्प है

Nadim S. Akhter 19 March 2020




लड़ाई बहुत सूक्ष्म स्तर पे है। एक वायरस को मारने के लिए उसका एंटीडोट यानी दुश्मन बनाना है। इतनी तरक्की के बाद भी विज्ञान ये नहीं कर पाया है कि हमारे शरीर का प्रतिरोधी तंत्र हर नए बैक्टेरिया या वायरस को पहचानकर उससे लड़ने की सामग्री नैसर्गिक रूप से खुद शरीर के तत्वों से जुटा ले। इस पे रिसर्च तेज़ होनी चाहिए। 




क्या हम अपने शरीर में हानिकारक विषाणुओं और बैक्टीरिया से लड़ने वाली श्वेत रक्त कणिकाओं यानी #WBC को ऊपर से कोई ऐसा डोज़ दे सकते हैं कि वो माइक्रो लेवल पे किसी भी नए हमलावर की कमज़ोर नस पहचानकर उसे खत्म कर दे! क्या ये संभव है? वैक्सीन भी कुछ-कुछ इसी सिद्धांत पे काम करता है पर यहां बात हो रही है कि शरीर पे हमले के बाद वायरस को वहीं खत्म कर देना। वैक्सीन देकर immune system को मजबूत करने के फंडे से अलग। क्या कोई ऐसा चमत्कारी लिक्विड बन सकता है जो हर तरह के बैक्टेरिया और वायरस की प्राणशक्ति खत्म कर दे! जान तो उनमें भी होती है और हमले से बचाव का कुदरती तरीका तो वो भी अपनाते हैं। हमारे शरीर के WBC से लड़ते हैं। सोचिए कितने माइक्रोस्कोपिक लेवल पर ये लड़ाई हमारे शरीर में हो रही होती है। एकदम इंसानों की फौज की तरह। 




हम तो अभी तक ये भी नहीं जानते कि ये वायरस और हमारी श्वेत रक्त कणिकाएं आपस में जो संवाद करती हैं, वो किस लेवल का होता है और उसके कितने आयाम हैं। सबकुछ बहुत अद्भुत और विस्मयकारी है। सो लड़ाई सिर्फ कोरोना वायरस से नहीं है। हर उस वायरस और बैक्टेरिया से है, जो इंसानी शरीर को बीमार करने की ताकत रखता है। क्या नैनो टेक्नोलॉजी में इसका उपाय है? क्या हम वायरस को multiply होने से रोक सकते हैं? सच पूछिए तो क़ुदरत के राज का अभी हम 5 फीसद भी नहीं जानते। एक आंखों से नहीं दिखने वाले अति सूक्ष्म वायरस ने पूरी दुनिया को हलकान कर दिया। और इंसान का घमंड ये कि वह मंगल पे बस्ती बसाएगा। पहले धरती के वायरस से तो निपट लो और अपने शरीर को तो अच्छे से जान लो! फिर जाना अपना ये शरीर लेकर मंगल ग्रह। बस्ती बसाने।

Post a comment

0 Comments