ऋषि कपूर की मौत के बाद उनके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर नफ़रत फैलाने वाले ये लोग कौन थे !

"हरदिलअजीज और हंसमुख चिंटू के इस दुनिया से जाने के बाद कल सोशल मीडिया पर उनके ख़िलाफ़ एक Hate Campaign चला। ये लोग स्वर्गीय ऋषि कपूर पर डोमेस्टिक वॉयलेंस से लेकर तमाम तरह के आरोप लगा उन्हें बुरा इंसान बताने की मुहिम चला रहे थे। इनमें कुछ पत्रकार भी शामिल थे "

Nadim S. Akhter 1 May 2020


बहुत अफसोस की बात है कि कल अभिनेता ऋषि कपूर की मौत के बाद कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर उनके ख़िलाफ़ लिखा और कैम्पने चलाने की कोशिश की। ये लोग स्वर्गीय ऋषि कपूर पर डोमेस्टिक वॉयलेंस से लेकर तमाम तरह के आरोप लगा उन्हें बुरा इंसान बताने की मुहिम चला रहे थे। इनमें कुछ पत्रकार भी थे। पहले ऋषि साब पर लगे सारे आरोप गिना देता हूँ, फिर बारी-बारी से उन सबका जवाब भी दूंगा।



ऋषि साहब पर पहला आरोप डोमेस्टिक वॉयलेंस यानी घरेलू हिंसा का है जो ज़ाहिर है, उनकी पत्नी नीतू कपूर के कंधे पर बंदूक़ रखकर लगाया गया। इसमें कुछ ख़बरों का हवाला देकर ये बताया गया कि कैसे नीतू कपूर ने ऋषि कपूर के ख़िलाफ़ डोमेस्टिक वॉयलेंस का केस किया था। फिर अपुष्ट सूत्रों के हवाले से ये बताया कि नीतू कपूर, उसके बाद ऋषि का घर छोड़कर चली गई थीं और आजीविका के लिए सैलून तक चलाया। 

ऋषि कपूर पर दूसरा ये लगा कि वे Child pornography को बढ़ावा देने वाले इंसान थे और इस बाबत मुंबई के एक एनजीओजय हो फाउंडेशनने उनके खिलाफ एक केस भी दर्ज कराया था। यह केस Protection of Children from Sexual Offences Act के तहत था। 

तीसरा आरोप ऋषि कपूर पर ये लगाया गया कि वह महिलाओं का सम्मान नहीं करते थे और उनके बारे में अनाप-शनाप ट्वीट कर देते थे। इसमें उनके दो ट्वीट का हवाला दिया गया। इसमें ऋषि जी के उस ट्वीट का हवाला दिया जा रहा था, जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम लॉर्ड्स में विश्व कप का फ़ाइनल इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेल रही थी। तब ऋषि कपूर ने जो ट्वीट किया था, वो मैं नीचे कॉपी-पेस्ट कर रहा हूँ।

“Waiting for a repeat of Sourav Ganguly’s act on the balcony of The Lords Ground, London, when India beat England 2002 NatWest series final! YO.”

बहुत ही चालाकी से इस ट्वीट का मतलब भाई लोगों ने ये बताया कि ऋषि कपूर चाहते थे कि भारतीय महिला टीम भी मैच जीतने के बाद बालकनी में आकर सौरव गांगुली की तरह अपना टीशर्ट निकाले और हवा में लहराए। उस वक़्त इस ट्वीट के बाद ऋषि कपूर को ट्विटर पर काफ़ी भला-बुरा कहा गया।

उनका दूसरे ट्वीट का जिक्र सेलिब्रिटी किम करदाशियां को लेकर था, जिसमें ऋषि कपूर ने सोशल मीडिया पर किम पे बने एक वायरल मेमे को शेयर किया था। इसमें किम के कपड़ों की तुलना बोरी में बंद प्याज़ से की गई थी।  इस मेमे को शेयर करते हुए ऋषि ने लिखा था- Onions in a mesh bag!





तो इन सारे आरोपों की खिचड़ी ऐसी पकाई गई कि अच्छे-अच्छे लोगों को हमने ये लिखते देखा कि ऋषि कपूर को श्रद्धांजलि देने से पहले ये देख लो कि वह कितने निम्न स्तर के इंसान थे। किसी के मरने के बाद उसके पाप कम हो जाते हैं क्या ? ऐसी तमाम बातें तथाकथित बुद्धिजीवियों ने लिखीं। ये सब देखकर मेरा दिल बैठ गया। सोचा, वहीं उनको जवाब दूँ पर खून का घूँट पीकर रह गया। फिर विचार बनाया कि कलम का जवाब कलम से ही दूँगा। वो भी मुंहतोड़। 

तो सबसे पहले ऋषि कपूर के लिए नफरत बो रहे विद्वानों के पहले आरोप का जवाब। 

डोेमेस्टिक वायलेंस के आरोप का बुलबुला 


तो ऐसा है बंधुओं ! अगर पत्रकार हो तो ख़बर को कन्फर्म भी करना सीखो। आरोप तो कोई किसी पर, कुछ भी लगा सकता है। मुझे नीतू कपूर द्वारा डोमेस्टिक वॉयलेंस का केस करने संबंधी जो भी ख़बर इंटरनेट पर दिखी, वह सब अटकलों पर आधारित थी। माना जाता है, बताया जाता है टाइप। अरे पुलिस में केस हुआ है तो जाकर थानेदार से वर्जन लाओ ना ! लिखो तो पुलिस क्या बोल रही है? लेकिन घरेलू हिंसा के आरोप वाली किसी भी ख़बर में मुझे पुलिस का कोई कन्फर्मेशन नज़र नहीं आया। यानी ख़बर या तो हवाहवाई थी या डेस्क पर बैठ सपने में लिखी गई थी। 

अब दूसरा पहलू। भई, मियाँ-बीवी के बीच झगड़े किस घर में नहीं होते। हो सकता है कि ऋषि कपूर के वैवाहिक जीवन में भी कुछ अनबन हुई हो। बात थाना-पुलिस तक भी पहुँची हो पर इससे आप ऋषि कपूर को नारी विरोधी कैसे बता सकते हैं ? नीतू जी के साथ वह अपना भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। इसलिए कोई मूर्ख ही इस तरह के आरोप लगाकर एक दिवंगत आत्मा को बदनाम कर सकता है। 


वैसे आपकी जानकारी के लिए ये बता दूँ कि ख़ुद ऋषि कपूर ने अपनी किताबखुल्लमखुल्लामें लिखा है कि शादी के बाद अपनी फ़्लॉप होती फ़िल्मों की वजह से वह डिप्रेशन में जाने लगे थे और इसके लिए नीतू कपूर को ज़िम्मेदार ठहराने लगे थे। तब नीतू कपूर प्रेग्नेंट थीं। बाद में ऋषि कपूर को इस बात का बहुत मलाल हुआ कि उनकी वजह से उस वक़्त नीतू जी किस कदर मानसिक दबाव में रही होंगी। ऋषि कपूर ने इस किताब में अपनी ज़िंदगी की कोई बात उन्होंने छुपाई नहीं। सब खुलकर बता दिया है। सो घरेलू हिंसा का आरोप भी कहीं टिकता नहीं।

अब आते हैं दूसरे आरोप में, जिसमें मुंबई के जय हो फाउंडेशन नामक एक एनजीओ ने लाइमलाइट में आने के लिए ऋषि कपूर पर Protection of Children from Sexual Offences Act के तहत मुकदमा दर्ज करवा दिया था। नीचे उस वीडियो का स्क्रीनशॉट दे रहा हूं, जिसे लेकर उन पर ये आरोप लगा था। आप ही देखिए और सोचिए।















दरअसल हुआ ये था कि ऋषि कपूर एक मजाकिया इंसान भी थे और मजाक-मजाक में सीरियस बात कह देना उनकी आदत थी। तब गुरमीत राम-रहीम का मामला गर्म था। इसे लेकर ऋषि साब ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें एटीएम जैसी किसी मशीन के सामने खड़ी एक लड़की को पीछे से एक छोटा बच्चा छेड़ता है। लड़की जब पीछे मुड़ती है तो सामने एक बड़ा बच्चा भी खड़ा होता है। लड़की समझती है कि ये हरकत बड़े बच्चे ने की है। वह उसे तमाचा जड़ देती है। अब बड़ा बच्चा लाइन में छोटे बच्चे को आगे कर देता है और ख़ुद पीछे खड़ा हो जाता है। छोटा बच्चा फिर लड़की को पीछे से टच करता है तो अबकी बार फिर लड़की पीछे घूमकर तमाचा बड़े बच्चे को ही मारती है। यानी करे कोई और भरे कोई। 


ऋषि कपूर ने तब अपने ऊपर हुए इस एफआईआर पर कहा था कि चूँकि वह सेलिब्रिटी हैं, इसलिए उन्हें टार्गेट किया जा रहा है। वह इस वीडियो के सहारे लोगों को बताना चाहते हैं कि अपने दिल की आवाज़ सुनो, ढोंगी बाबाओं की नहीं। इसके बाद उन्होंने वह ट्वीट डिलीट भी कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम में हुआ ये कि ऋषि कपूर के नाम का फ़ायदा उठाकर मुंबई का एक अनाम एनजीओ ख्याति पा गया। यानी दूसरों को बदनाम करके ख़ुद का नाम हो गया। और पब्लिक के लिये ये हुआ कि खाया पिया कुछ नहीं और गिलास फोड़ा बारह आने का। मुझे व्यकितगत तौर पर उस वीडियो में ऐसा कुछ नहीं दिखा कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी टाइप कोई मामला बने। एक ह्यूमर का वीडियो था, जिसे लेकर एनजीओ अपनी दुकानदारी चमकाने थाने पहुँच गया।

चलिए, अब चलते हैं तीसरे आरोप पर कि ऋषि जी महिला विरोधी थे और महिलाओं का सम्मान नहीं करते थे। वह मैच जीतने पर महिला क्रिकेट टीम से भी सौरव गांगुली जैसे व्यवहार की अपेक्षा करते थे। यानी शर्ट उतारने वाली बात। तो ट्विटर पर मूर्ख लोगों को कौन समझा सकता है भाई? बड़े-बुजुर्ग कह गए हैं कि जब बात समझ ना आए, तो इंसान को चोंच बंद रखनी चाहिए। पर भारत में सब चोंच फाड़ने वाले ही हैं। जरा देखिए, मरहूम ऋषि साब ने क्या ट्वीट किया था- “Waiting for a repeat of Sourav Ganguly’s act on the balcony of The Lords Ground, London, when India beat England 2002 NatWest series final! YO.”




अगर अंग्रेज़ी ना आती हो तो इसका ट्रांसलेशन ये है कि लॉर्ड्स ग्राउंड की बालकनी में सौरव गांगुली जैसे करतब की प्रतीक्षा है। यहाँ ऋषि जी ने कहां लिखा है कि महिला खिलाड़ी अपनी शर्ट उतारकर हवा में लहराएं ? अगर भाव आपको समझ नहीं आया, तो इसमें ऋषि जी की क्या गलती थी? वह तो अपनी महिला क्रिकेट टीम से इंग्लैंड को हराकर एक धाँसू विजयघोष की उम्मीद कर रहे थे। इसका तरीक़ा कुछ भी हो सकता था। पर नहीं। भाई लोगों को बाल की खाल निकालने की आदत होती है। सो ना आगे देखा, ना पीछा, ना कौआ और ना अपना कान, बस दौड़ पड़े कौए के पीछे कि मेरा कान ले गया, मेरा कान ले गया कौआ… ! वही मूर्ख लोग, जो तब ऋषि जी का ट्वीट नहीं समझ पाए थे, आज उनकी मौत के बाद पुराने गड़े मुर्दे निकालकर सोशल मीडिया पर बदबू फैला रहे थे। एक सभ्य समाज को ये सब शोभा देता है क्या ?

रही किम करदाशियां पर बने मेमे को ट्वीट करने की बात तो सिम्पल लॉजिक है गुरु। ऋषि कपूर फ़ैशन आइकन रहे थे। उन्हें इसकी समझ थी। सो किम के कपड़ों के डिज़ाइन की तुलना जब बोरी में बंद प्याज़ से करने वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो बतौर एक यूज़र उन्होंने भी हास-परिहास के अंदाज में इसे शेयर कर दिया। क्या हम बातचीत में कभी-कभी अपनी महिला मित्रों, यहाँ तक कि घर की महिलाओं से भी ये नहीं कह देते कि आज सुग्गे यानी तोते जैसी ड्रेस क्यों पहनी हो ? सो बाल-बच्चेदार और जिम्मेदार बुजुर्ग ऋषि कपूर भी जब ऐसी ही कोई तस्वीर शेयर कर देते हैं तो इसमें महिलाओं का अपमान कैसे हुआ मूर्खाधिराज महाराज !! या तो गंदगी आपके दिमाग़ में है या फिर आप ग्लास को हमेशा आधा ख़ाली देखते हैं। ग्लास को आधा भरा हुआ देखने की भी आदत डाल लीजिए। ज़िंदगी ख़ुशगवार गुजरेगी।




एक बात और। ना मैं स्वर्गीय ऋषि कपूर साहब का प्रवक्ता हूँ और ना ही कोई समाज सुधारक। बस, सही को सही और ग़लत को ग़लत कहना मुझे आता है। आप लोगों को शर्म नहीं आई कि एक बुजुर्ग एक्टर, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से भारतीय सिनेमा को इतना कुछ दिया, जिन्होंने अपनी फ़िल्मों से आपकी ज़िंदगी के कई अनुभवों को जीवंत कर दिया, जो जीवन भर सच के साथ खड़ा रहा और कभी ये परवाह नहीं की कि सत्ता या समाज या दोस्त-यार क्या बोलेंगे, बेबाक़ और बेलाग तरीक़े से सार्वजनिक मंच पर अपनी बात रखी, उस बुजुर्ग के इस दुनिया से जाने के बाद इतनी नीचता पर उतर आए आप लोग !! धिक्कार है। जो लोग कल बड़े पाक-साफ बनकर ऋषि कपूर पर सोशल मीडिया पे इल्ज़ाम लगा रहे थे, उनसे यही कहूँगा कि बॉस! पहला पत्थर वो मारे, जो पापी ना हो। जिगर चाहिए सच बोलने के लिए। 


ऋषि कपूर तो ऐसे इंसान थे, जिन्होंने अपनी ज़िंदगी को खुली किताब बनाकर जनता के बीच उछाल दिया। अपनी यादों को समेटते हुए किताबखुल्लमखुल्लामें ये भी बता दिया कि उनके पिता स्वर्गीय राजकपूर साहब का मरहूम नरगिस जी और बैजयंतीमाला जी से अफ़ेयर था। एक वक़्त था जब अवॉर्ड के लिए उन्होंने पैसे दिए थे, ये भी कबूला। अब बोलिए, जो इंसान इतनी ईमानदारी से अपने परिवार और ज़िंदगी के राज बता रहा हो, वह क्या छिपाएगा हमसे ? जो कुछ छुपा था, सब ज़ाहिर तो कर दिया उन्होंने अपनी किताब में ! और अगर आपमें इतनी बुद्धि नहीं है कि आप उनके ट्वीट को समझ सकें तो उसका ग़लत इंटरप्रिटेशन बनाकर उनको बदनाम और ज़लील तो मत करो ! जिस भारतीय संस्कृति की आप दुहाई दे रहे हो, वह मरने के बाद दुश्मन के बारे में भी अपशब्द नहीं निकालती क्योंकि तब पाक रूह परमात्मा से जा मिली होती है और नश्वर शरीर ही जहान में रह जाता है। सो उस रूह यानी आत्मा का अपमान, परमात्मा का अपमान माना जाता है। क्या इत्ती छोटी सी बात आप लोगों को समझ नहीं आई ? बड़े फ़र्ज़ी आदमी हो यार आपलोग !!

#Nadimkibaat #नदीमकीबात


  • नोट- ऋषि कपूर साहब पर डोमेस्टिक वॉयलेंस का आरोप लगाने वाली जो दो ख़बरें छपी हैं, उनका लिंक यहाँ दे रहा हूं। आप चाहें तो उसे पढ़ सकते हैं।


http://www.catchnews.com/bollywood-news/when-neetu-kapoor-filed-a-domestic-violence-case-against-rishi-kapoor-80045.html


https://www.indiatimes.com/entertainment/celebs/celebrities-accused-of-domestic-violence-and-the-victims-278923.html#2



  • साथ ही ऋषि साहब पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी को बढ़ावा देने वाला जो आरोप एक एनजीओ ने लगाया था, उसकी ख़बर का लिंक नीचे हैं


https://www.indiatoday.in/movies/celebrities/story/fir-filed-against-rishi-kapoor-for-posting-about-child-1032143-2017-08-27










Post a Comment

1 Comments