कोरोना पर नफ़रत क्यों बाँट रहा है मीडिया ?

" कोरोना काल में देश पे आए इतने बड़े संकट पर भी #डायन मीडिया fake news के सहारे हिन्दू-मुसलमान को लड़वाने में लग गया है। ये शर्मनाक नहीं, गंभीर #अपराध है। इन टीवी चैनलों के खिलाफ अदालत में #क्रिमिनल #केस दर्ज होना चाहिए और इस बारे में #जनहितयाचिका दाखिल होनी चाहिए। इसमें चैनल के एंकर, संपादक और #मालिक को पार्टी बनाया जाना चाहिए "

Nadim S. Akhter


पिछले कुछ दिनों से भाई लोग खूब हिन्दू-मुसलमान कर रहे हैं। #निज़ामुद्दीन स्थित #मरकज़ के मामले में। इसमें मेरे कई मित्र भी शामिल हैं । ये शर्मनाक है कि देश का #मीडिया #कोरोना संकट में भी #हिन्दूमुसलमान करने लगा। दुनिया पे आयी इतनी बड़ी आफत पर भी नफरत और वोट बैंक की #राजनीति से सीचने लगा। कल टीभी पे #news #anchors को नफरत का सौदा करते थोड़ा सा देखा। जो वे कह और बोल रहे थे, उसे सुनकर टीभी बंद कर दिया। इतनी गिरी हुई और घिनौनी हरकत! मुझे समझ नहीं आ रहा कि इस देश का मीडिया अब रसातल से भी नीचे कहाँ चला गया है? अब ये #दलाल #media भी नहीं रहा। उससे भी आगे निकल चुका है। उसके लिए अब कोई नया शब्द ढूंढना पड़ेगा। कहते हैं #डायनभी सात घर छोड़कर जान लेती है। पड़ोसी का इतना लिहाज बाकी रखती है। ये तो उससे भी गए-गुज़रे निकले। देश पे आए इतने बड़े संकट पर भी fake news के सहारे हिन्दू, मुसलमान को लड़वाने में लग गए। ये शर्मनाक नहीं, गंभीर #अपराध है। इन चैनलों के खिलाफ अदालत में #क्रिमिनल #केस दर्ज होना चाहिए और इस बारे में #जनहितयाचिका दाखिल होनी चाहिए। इसमें चैनल के एंकर, संपादक और #मालिक को पार्टी बनाया जाना चाहिए।


1. पहली बात तो ये कि इन्होंने #फेक #news चलाई। गलत और भ्रामक जानकारी जनता को परोसी। ये पत्रकारिता के उसूल के भी खिलाफ है और चैनल को दिए गए लाइसेंस की शर्तों का भी उल्लंघन। वो फेक न्यूज़ क्या-क्या थी, वो सब रिकॉर्ड पे है। #youtube पे लहरा रहा है। सो ये नपेंगे और नापे जाएंगे, ये पक्का है। 

2. दूसरी बात। इस फेक न्यूज़ के सहारे इन्होंने देश में एक समुदाय यानी मुसलमानों के खिलाफ नफरत का ज़हर भरा। यानी कोरोना संकट के समय देश का साम्प्रदायिक माहौल खराब करने की कोशिश की। सिर्फ इसी बात पे इनपे #IPC की कौन-कौन सी धाराएं लगेंगी, क़ानून की किताब खोलकर देख लीजिएगा। और फिर उनमें सज़ा का क्या प्रावधान है, ये भी। इसका विस्तार ये है कि ये टीभी न्यूज़ चैनल वाले देश की बहुसंख्यक आबादी को उकसा रहे थे कि वो मुस्लिमों की #mob#lynching करे। देश में #मॉबलिंचिंग के इतिहास को देखते हुए ये साबित किया जा सकता है कि फेक न्यूज़ पे पगलाई मूर्ख जनता कैसे पकड़कर किसी को भी मार डालती है। सो जैसे ही सड़क पे कोई दाढ़ी और टोपी वाला आदमी दिखेगा तो जनता कहेगी कि मारो उसे। इन्हीं लोगों ने देश में कोरोना फैलाया है। सो इस भयानक जुर्म के अपराध में एंकर, संपादक और चैनल के मालिक के खिलाफ क्या-क्या धाराएं लगेंगी और कितनी सज़ा होगी, ये भी किसी वकील से पूछ लीजिएगा।


एक बात और। आज के बाद आप लोग हिन्दू-मुसलमान करके नफरत का बीज बोने वाले एंकर्स को गाली देना बंद करिए। आप असली विलेन को पकड़ो और वह है चैनल का संपादक। उसकी मर्जी और मंजूरी के बगैर कोई टीवी (टीभी) पे कोई भी डिबेट नहीं हो सकती। सब कुछ पहले से तय होता है कि debate कौन एंकर कर रहा है, उसमें कौन-कौन panelist यानी मेहमान हैं, उनमें से कितने दाढ़ी वाले फर्जी मौलाना हैं, कितने चुटिया और गेरुवा वस्त्र वाले फर्जी पंडित और धर्मगुरु हैं, कौन किस लाइन पे बोलेगा यानी एंकर के फैलाए ज़हर वाली बात का समर्थन करेगा या दिखावे के लिए उसकी बात का विरोध, कौन ज्यादा चिल्लायेगा, एंकर किसे ज्यादा बोलने का मौका देगा/देगी, कौन-कौन से visual एडिट करके और किस संदर्भ में debate के दौरान बार-बार चलेंगे जिससे देखने वाली जनता का खून खौल उठे, twitter पर कौन सा शब्द ज़हरीला hashtag बनाकर चलाया जाएगा, डिबेट के दौरान पब्लिक के सिर्फ ज़हरीले ट्वीट को ही टीवी स्क्रीन पर दिखाया जाएगा आदि आदि...यानी A to Z, सब कुछ तय होता है। 

और ये सब कुछ, जी हां, सब कुछ चैनल के संपादक की जानकारी और मंजूरी से ही होता है। सो असली और सबसे बड़ा विलेन वही है। हिन्दू मुसलमान के बीच नफरत फैलाने की फैक्ट्री की कमान उसी के हाथ में है। एंकर तो महज एक मोहरा है जिसे चैनल का संपादक जब चाहे, डंप कर दे। कूड़ेदान में डाल दे। चाहे तो उसकी जगह किसी और को बिठा दे। सो आगे से जब भी टीवी चैनल पर हिन्दू मुसलमान और नफरत देखिये तो ढूँढिये, पता करने की कोशिश करिए कि इस न्यूज़ चैनल का संपादक कौन है? उससे सवाल पूछिये कि आपके चैनल पर ये फर्जी खबर क्यों और कैसे चली? अपने ये होने कैसे दिया? फिर चैनल के मालिक और मालकिन को पकड़िए कि आप के चैनल पे नफरत का प्रचार प्रसार हुआ और आप चुप रहे। क्यों? कैसे?


मीडिया के प्रोपोगंडा age में एक सजग लोकतंत्र वाली जनता को ये सब करना होगा। नहीं करेंगे तो बेच दिए जाएंगे। कौड़ियों के भाव और आपको पता भी नहीं चलेगा। सो थोड़ा #google करिए और ये पता लगाइए कि किस-किस चैनल का Editor, News Director, Managing Editor, Editor in Chief, Chief content officer आदि-आदि कौन हैं। फिर उनको पकड़िए कि आपके चैनल पे ये फेक न्यूज़ कैसे चली और नफरत फैलाने वाला वो बुलेटिन/डिबेट कैसे चला? जो लोग वकील हैं, क़ानून के जानकार हैं वे देश और समाज के हित में इनपे केस बनाकर इनको अदालत में घसीटें। अपना समय और पैसा लगाएं। PIL दाखिल करें। तभी ये लोग line पे आएंगे। ये देश और समाज हम सब का है और हमें मिलकर इसे बचाना होगा। टीभी न्यूज़ की शक्ल में खुली बनियों की दुकान को हम इस देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को बेचने की इजाज़त बिल्कुल नहीं दे सकते। बिल्कुल भी नहीं। सो टीभी न्यूज़ के इतिहास का एक पॉपुलर जुमला दोहराता हूँ कि --चैन से सोना है तो अब जाग जाओ, वरना तुम्हारी दास्तां भी ना मिलेगी दास्तानों में! ऐ हिन्दोस्तान वालों!

जागो हिंदुस्तानियों, जागो!!!

बाकी निज़ामुद्दीन मरकज़ पे क्या और कैसी फेक न्यूज़ चली, कैसे false narrative बनाया गया और किस तरह नफरत के बुलेटिन से हिंसा की ज़मीन तैयार की गई, उस पे अगली पोस्ट में।

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