वैज्ञानिक हॉकिंग का दिमाग़ कभी समझ ही नहीं पाया कि भगवान क्या चीज है !

" हॉकिंग्स ने अतिउत्साह में भगवान को नकार दिया। मानव होने के नाते आपको अपने मस्तिष्क की सीमा पता होनी चाहिए थी "

Nadim S. Akhter 29 April, 2020


हॉकिंग अतिउत्साही वैज्ञानिक थे। इसी अतिरेक में उन्होने ईश्वर की सत्ता को झूठा बता दिया। एक वो वक्त भी आया जब  बोसॉन कण को लेकर उनकी मान्यता गलत निकली। इसे ढूंढ लिया गया। इससे हॉकिंग्स को सदमा जरूर लगा होगा। फिर भी वह भगवान जैसी किसी चीज को बकवास बताते रहे। वह कभी ये नहीं समझ पाए कि सिंगुलैरिटी से पहले यानी सृष्टि के निर्माण से पहले की अवस्था को वह गणित के किसी equation में कैसे समा सकते हैं  भला? 


इस ब्रह्मांड में आदि से अनंत और सूक्ष्म से वृहद, हर चीज़ नियत है और नहीं भी। सूक्ष्म से सूक्ष्मतम जाने की प्रक्रिया अभी तो शुरू ही हुई है, जिसका एक पायदान है बोसॉन कण। उसके क्या घटक हैं, ये तो हमें अभी पता ही नहीं जो सेकेंड के पता नहीं कौन से हिस्से में अपनी झलक दिखाकर गायब हो गया। 

हॉकिंग्स ब्लैक होल पे जो कह गए है, उसके मिथक अभी टूटेंगे क्योंकि विज्ञान बिना प्रयोग के कोई भी सिद्धांत दावे से नहीं देता और ब्लैक होल के नज़दीक हम जा भी नहीं सकते। फिर कैसे बता सकते हैं कि उसके अंदर क्या हो रहा है??


जहां तक आइंस्टीन की बात है तो वे ना सिर्फ एक वैज्ञानिक थे बल्कि एक दार्शनिक भी थे। ईश्वर के वजूद को स्वीकारने की जगह छोड़ना इस बात का सुबूत है कि विज्ञान मूलतः हमारे मस्तिष्क की सीमा है। जितना हम सोचते हैं, उससे कहीं विशाल ये ब्रह्मांड और उसमें राज़ हैं। और अगर मैं ये कहूँ कि हमारा अनंत ब्रह्मांड भी एक विशाल सुपर डुपर मल्टी ब्रह्मांड का महज़ एक अंश है तो विज्ञान इसे ना नहीं बोल पाएगा। पर वह इसे स्वीकार भी नहीं करेगा क्योंकि अभी तक हम अपने ब्रह्मांड के छोर तक क्या, इसके .0001 प्रतिशत तक की भी थाह नहीं ले पाए हैं। सो ऐसे सवालों पे विज्ञान बीच का रास्ता दे देता है। हो भी सकता है और नहीं भी। यही आइंस्टीन ने किया। 


भगवान के बारे में आइंस्टीन को अपनी सीमा पता थी। पर हॉकिंग्स उद्दंड थे और अतिउत्साही भी कि भगवान को नकार दिया। जब आपको मानव होने के नाते अपने मस्तिष्क की सीमा पता है तो ईश्वर जैसे रचियता के बारे में क्यों निर्णय दे रहे हैं। ये तो वही बात हो गयी कि कोरोना वायरस अपने साथियों से ये कहे कि ब्रह्मांड नाम की कोई चीज़ ही नहीं। जो है, वो यही माइक्रो वर्ल्ड है, जिसमें हम जैसे वायरस रहते हैं। अब कोरोना वायरस का दिमाग कितना है? उतना ही ना, जितना उसे ईश्वर ने दिया है।


#God #Einstein #Hawkings 

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