फेंक न्यूज़ के ज़माने में पब्लिक भेड़ है, जिधर हाँकोगे चल देगी

"हम information age में सूचना की ही लड़ाई लड़ रहे हैं। ये विकृत हो सकती है, फर्जी हो सकती है, आधी हो सकती है और सच्ची भी हो सकती है। पर जनता के एक बड़े हिस्से को इसमें फर्क करना अभी नहीं आ रहा "

Nadim S. Akhter


आजकल #SocialMedia पे सबको देख, पढ़ और समझ रहा हूँ। हम बोलेंगे, मगर आखिर में। बाकी पत्रकार और बुद्धिजीवी होने का भ्रम पाले लोग ज़रूरी नहीं कि समझदार और #sharp भी हों। जो #intelligent हैं, वो घड़े में छेद देख रहे हैं। 



बाकी आम जनता और पब्लिक तो भेड़ है। जिधर हाँकोगे, उधर चल देगी। #Social #media#whatsapp और #fake #news ने काम आसान कर दिया है। ये दौर जनसंचार यानी #mass#communication में एक #case #study बनेगा और भावी पीढियां इससे सबक लेंगी कि #information #bombardment और #echo #chamber के सहारे कैसे सत्ता लोकतंत्र को #भीड़तंत्र में तब्दील करने की कोशिश कर रही थी और इसमें कुछ हद तक कामयाब भी हो रही थी। दुनिया में कई जगह ऐसा हो रहा है। ये #ripples हैं, जिनके असरात पड़ोसी मुल्कों तक भी जाते हैं। वहां भी ऐसा ही कोई #ripple #effect पैदा हो रहा होता है जो बगल के देश तक जाता है। सो पूरी दुनिया इसकी चपेट में आ जाती है। कोरोना वायरस से ज्यादा तेजी से ये फैलता है और इसके #hot#spot अब विकसित देशों में भी हैं। 


हम information age में सूचना की ही लड़ाई लड़ रहे हैं। ये विकृत हो सकती है, फर्जी हो सकती है, आधी हो सकती है और सच्ची भी हो सकती है। पर जनता के एक बड़े हिस्से को इसमें फर्क करना अभी नहीं आ रहा। अच्छे-अच्छे धोखा खा जा रहे हैं। जनता त्वरित टिप्पणी देने को आतुर है, बिना ये जाने कि उसके सामने थाली में सज़ा के जो सूचना परोसी गयी है, वह असल साधु है या साधु का वेश धरा कोई रावण ! 99 फीसद जनता लक्ष्मण रेखा पार करके सीधे अशोक वाटिका में विलाप करने को अभिशप्त है। उसमें सूचना को परखने का ना कोई हुनर है, ना उत्सुकता और ना ही समय। वह fast food की तरह अधकचरी या फिर विषाणुओं से लैस सूचना को निगलकर बीमार हो रही है। दुनियाभर के लोकतंत्र पे ये संकट अब ज्यादा बड़ा हो गया है। खासकर भारत पाकिस्तान और अन्य विकासशील देशों पर। 


सो अगर ये देश सूचना की लड़ाई हार गए तो बहुत जल्द इनके यहां से लोकतंत्र खत्म हो जाएगा और उत्तर कोरिया की तरह जो तानाशाही निजाम बनेगा, वह भी लोकशाही की मीठी गोली में लपेटकर मिलेगा। जनता समझ ही नहीं पाएगी कि वह नागरिक से प्रजा कब बन गई!!

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