इधर कुआँ और उधर खाई में फँस गए हैं पीएम मोदी

Nadim S. Akhter 12 May 2020


आप कुछ भी कयास लगा लीजिए पर कोई नहीं जानता कि आज पीएम मोदी रात 8 बजे क्या ऐलान करने वाले हैं। महाराष्ट्र और गुजरात जैसे कुछ राज्यों में lockdown बढ़ाना मजबूरी है, कुछ राज्यों में ढील दी जा सकती है। रही रेल और हवाई जहाज़ की बात, तो हो सकता है कि जल्द वो भी खोले जाएं। आखिर इतने मजदूर जो घर वापिस जा रहे हैं, lockdown का पालन तो नहीं ही हो रहा है ना! मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए श्रमिक स्पेशल ट्रेन भी चल रही है और सड़क के रास्ते मजदूर पैदल भी झुंड में घर लौट रहे हैं। पर क्या किया जा सकता है? बिना प्लानिंग के हुए लॉकडाउन में ये स्थिति तो होनी ही थी। जब लॉकडाउन पहली दफा घोषित हुआ तो देश में कोरोना के गिने-चुने घोषित मामले थे, यानी सरकारी आंकड़ों में इनकी संख्या बहुत कम थी। सो अगर उस वक्त एक हफ्ते का वक्त देकर ये कह दिया जाता कि एक सप्ताह बाद देश में लॉकडाउन लागू होगा, जिसे जहां पहुंचना है, चला जाए तो ऐसी स्थिति नहीं होती। सरकार के लिए भी सिरदर्द नहीं होता और गरीब मजदूर भी गांव की अपनी झोपड़ी मे पहुंच चुका होता। कम से कम घर जाते हुए हार्ट अटैक, गर्मी, बीमारी और ट्रेन से कटकर नहीं मरता। पर ऐसा हो ना सका।


अब जब लॉकडाउन-३ चल रहा है और चौथे लॉकडाउन की आशंका जताई जा रही है तो आज रात 8 बजे पूरे देश की निगाहें पीएम मोदी पर होंगी कि उनकी सरकार अजीबोग़रीब स्थिति में फँस चुके देश को इससे बाहर निकालने का क्या रास्ता लेकर आ रही है। क्या लॉकडाउन-4 लागू होगा? या फिर कुछ रियायतों के साथ लॉकडाउन चालू रहेगा? या फिर लॉकडाउन को सीमित करके आर्थिक गतिविधियों को चालू करने की देशव्यापी इजाज़त मिल जाएगी? सवाल कई हैं और जवाब आज रात को देश को मिल जाएगा।

वैसे सोशल मीडिया से लेकर हर जगह ये कयास हैं कि आज रात 8 बजे पीएम मोदी लॉकडाउन को लेकर क्या नई घोषणा करने वाले हैं पर ठीक-ठीक बात किसी को पता नहीं। हर एक्सपर्ट इस पर अपनी राय देता है क्योंकि वह सिर्फ अपने चश्मे से परिस्थितियों को देखता है। मुझे लगता है कि लॉकडाउन को लेकर एक समग्र नजर बनाने की जरूरत है और स्वार्थी ना होकर इस चक्रव्यूह से निकलने की एक कुशल योजना बनाने की दरकार है, तभी 130 करोड़ की आबादी वाला ये विशाल देश कोरोना जैसे सूक्ष्म वायरस से पार पा सकता है, वरना बड़ी मुश्किल होगी।


सो तमाम हालात पर गौर करने के बाद मुझे लगता है कि कुछ रियायतों के साथ lockdown धीरे-धीरे खोलने का ऐलान आज हो सकता है। लेकिन अगर जून-जुलाई में कोरोना के भारत में peak पर रहने की आशंका को देखें और सरकार एक बार फिर अर्थव्यवस्था को किनारे कर सिर्फ कोरोना नियंत्रण पे फोकस करे, तो lockdown बढ़ सकता है, पहले की तरह। फिर वही बात होगी कि जहां कोरोना कंट्रोल में है, वहां ढील दी जाएगी। पर समग्र रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था को इस ढील से कोई फायदा नहीं होने वाला।

इसलिए सरकार अब दोराहे पे खड़ी है। या तो lockdown में तगड़ी ढील देकर छोटे और बड़े उद्योगों को काम करने की इजाज़त दे, असंगठित मजदूर वर्ग को भी दिहाड़ी कमाने की छूट दे, दुकानदारों को कुछ पाबंदियों के साथ दुकानें खोलने की इजाजत दे और सुरक्षा उपायों के साथ पब्लिक को बाजार में टहलने की सुविधा दे या फिर..


कंप्यूटर मॉडल से बताई गई उस भविष्यवाणी को सिरमाथे रखे कि जून-जुलाई के आगामी महीनों में भारत में कोरोना के मामले उच्चतम स्तर पर होंगे। ऐसे में लॉकडाउन का सख़्ती से पालन करवाए ताकि देश में कोरोना विस्फोट ना हो। सरकार के लिए ये बड़ी दुविधा की स्थिति है। इधर शेर और उधर बब्बर शेर है। क्या किया जाए?

देश की अर्थव्यवस्था पाताल लोक में पहुँच चुकी है। नोटबंदी के बाद वह पहले ही बेहोश थी, अब तो कब्र में है। उद्योग और व्यापार जगत लगातार सरकार पर दबाव बनाए हुए है कि अब लॉकडाउन खोलकर उन्हें छूट दे वरना जो बचा-खुचा रह गया है, वह भी कबाड़ में तब्दील हो जाएगा। वह सरकार से Revival Package भी मांग रहा है ताकि बंद उद्योगों को दुबारा खड़ा कर सके और अपने कर्मचारियों को वेतन दे सके। लेकिन ये सब इतना आसान नहीं है। ये सरकार को भी पता है कि रिवाइवल पैकेज देने के बाद भी उद्योगों के सामने सबसे बड़ा संकट मांग का होगा। बाजार में कैश फ्लो एकदम ठप हो गया है, वह अलग मुसीबत है। हर उद्योग एक-दूसरे से चेन के रूप में बंधा होता है, सो अगर आगे वाला या पीछे वाला काम शुरु नहीं करेगा, तो आप अकेले काम शुरु करके क्या कर लोगे? आपका माल फंस जाएगा। ऐसी बहुत सी चीजें हैं, जिस पर विस्तार से डिस्कशन और योजना बनाने की जरूरत है। दो बूंद जिंदगी की वाला नारा अब उद्योगों के लिए लाना होगा और हर सेक्टर के हर छोटी-बड़ी इकाई की इसे एक साथ पिलाना होगा, तभी बैठ चुकी भारतीय अर्थव्यवस्था खड़ी हो पाएगी, वरना Great Recession की भविष्यवाणी दुनियाभर में बड़े-बड़े अर्थशास्त्री तो कर ही रहे हैं।


ये सब बिज़नेस की बात आपको इसलिए बताई कि जान सकें के कोरोना ने भारत पर डबल अटैक किया है। एक तो जान का नुक़सान और दूसरा- माल का नुक़सान। एक को बचाओ, तो दूसरे की जान जाती है। बहुत मुश्किल घड़ी है और अब तक तो सरकार ने जान की परवाह की है, माल के नुक़सान को किनारे रखा है। पर अब पानी नाक तक पहुँच गया है। इससे ज़्यादा सरकार अर्थव्यवस्था को इग्नोर नहीं कर सकती। ऐसे में सरकार के पास क्या मास्टर प्लान है, उसी की झलक आज रात 8 बजे पीएम मोदी के संबोधन में आपको दिखेगी। मुझे लगता है कि ये एक रोडमैप होगा कि हमारी सरकार अब किस दिशा में बढ़ना चाह रही है क्योंकि अर्थव्यवस्था का सवाल बहुत बड़ा है।

इसी के मद्देनज़र पिछले कुछ दिनों से पीएम मोदी कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए बैठकें कर चुके हैं और उनकी राय ली है। लेकिन दिक़्क़त ये है कि अपनी-अपनी परेशानी के मुताबिक़ हर राज्य की राय जुदा है। महाराष्ट्र जहां देश में कोरोना के कुल मामलों का क़रीब एक तिहाई मामला है, वहाँ के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे लॉकडाउन बढ़ाने को कह रहे हैं और बोल रहे हैं कि इसके अलावा और कोई चारा नहीं। उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अनेकानेक कारणों से केंद्र पर हमलावर हैं। पिछली दफ़ा की मीटिंग में उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार कोरोना पर उनकी मदद करने की बजाय confusion बढ़ा रही है। उनका कहना था कि एक तरफ केंद्र, दुकानें खोलने को कहता है तो दूसरी तरफ lockdown भी चाहता है। सो अगर दुकानें खुलेंगी, तो lockdown का पालन कैसे होगा? कल की मीटिंग में उन्होंने फिर केंद्र पर हमला किया और कहा कि केंद्र सरकार, कोरोना के बहाने राजनीति ना करे, राज्य सरकारें अच्छा काम कर रही हैं। भाजपा शासित राज्यों को केंद्र से कोई गिला नहीं और सुना है कि कल की मीटिंग में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ज्यादा बोलने भी नहीं दिया गया और गृहमंत्री ने उनसे कहा कि वह बस चंद लाइनों में अपनी बात रख दें। उन्होंने वैसा ही किया। 


लेकिन गैरबीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शिकायत कर रहे हैं। इनमें झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी शामिल हैं। वैसे मोदी जी राजस्थान के कांग्रेसी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ये कहकर तारीफ़ कह चुके हैं कि कोरोना से निपटने में उन्होंने अच्छा काम किया है। शायद यही वजह रही कि कल यानी सोमवार को पीएम के साथ मुख्यमंत्रियों की जो मीटिंग हुई, उसमें बोलने का सबसे ज़्यादा समय अशोक गहलोत को मिला। ख़बर है कि गहलोत २० मिनट से भी ज़्यादा बोले और सबने उनको सुना। उसके बाद बाक़ी मुख्यमंत्रियों को 5-7 मिनट में ही बात ख़त्म करने को कह दिया गया।

इससे एक बात साफ़ हो रही है कि अबकी बार पीएम मोदी लॉकडाउन को लेकर जो फ़ैसला करेंगे, उसमें सारे मुख्यमंत्रियों की राय का समावेश होगा। आरोप लगते रहे हैं कि पहले लॉकडाउन की घोषणा में पीएम मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रयों से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया और एकतरफ़ा तरीक़े से रात में टीवी पर आकर लॉकडाउन का ऐलान कर दिया। पर आज पीएम मोदी की तक़रीर पहले से जुदा होगी। अब उनके पास देशभर से काफ़ी फ़ीडबैक है, काफ़ी कुछ हो गया है, विशेषज्ञों की राय को आज़मा लिया गया है, उसका नतीजा भी देख लिया गया है और फिर अब आगे के एक्शन की तैयारी है। 


सो आख़िर में लाख टके का सवाल फिर वही है। आज पीएम लॉकडाउन को लेकर क्या घोषणा करेंगे? जैसा मैंने ऊपर लिखा है कि इस दफ़ा केंद्र की रणनीति में अर्थव्यवस्था प्रमुख पहलू होगा। सो हो सकता है कि लॉकडाउन में अच्छी-खासी ढील देकर आर्थिक गतिविधियों को चालू करने की इजाज़त मिल जाए। और जिन राज्यों में कोरोना का प्रकोप फैल रहा है, उन राज्यों की सरकारों से कहा जाए कि कोरोना के मामले कम होने पर वे भी अपने यहीं लॉकडाउन इसी तरह खोलें, जैसा केंद्र कह रहा है। सो आप देख लीजिए कि आप किस राज्य में हैं और आपके यहाँ कोरोना की क्या स्थिति है।

अगर आप रेड ज़ोन वाले इलाक़े में हैं तो फ़िलहाल किसी छूट की उम्मीद मत करिए। जो लोग ओरेंज या ग्रीन ज़ोन में हैं, उनके यहाँ बड़ी राहत मिलेगी। आर्थिक कारोबार शुरु हो सकेगा मगर मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन आपको हर हाल में, हर जगह करना पड़ेगा। तब तक, जब तक कि कोरोना की वैक्सीन बनकर ना आ जाए। उसके भी कई लफड़े हैं और ये आसान ना होगा। बनाने के बाद भी सबको ये वैक्सीन लग जाए, ये संभव हो नहीं पाएगा। उस पे फिर कभी। अगली पोस्ट में।

धन्यवाद।


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