Facebook और Microsoft का रिलायंस जियो में निवेश का मतलब है competitors का डिब्बा गुल

भारत के टेलिकॉम और ई-कॉमर्स सेक्टर में बड़े बदलाव के आसार


Nadim S. Akhter 30 May 2020


Facebook के मालिक Mark Zukerberg और #Microsoft के मालिक Bill Gates एक साथ। समझिए तकनीक में दुनिया के दो बेताज बादशाह की जोड़ी। अब तीसरे उभरते सितारे के बारे में सोचिए। Mukesh Ambani. Jio में फेसबुक बहुत पैसा लगा चुका है। खबर है कि अगली बारी बिल गेट्स की है। वह भी पैसा झोंकने वाले हैं। यानी jio दुनिया मुट्ठी करने को कमर कस चुका है। भारतीय होने का ज्यादा गर्व मत करिएगा, बाजार में एक कम्पनी के आधिपत्य और खुद के लुट जाने की फीलिंग से झूम जाइएगा।



एक बात और गौर करिए। क्या ये इत्तेफ़ाक़ है कि गेट्स की पतली स्वेटर और ज़करबर्ग की जीन्स लगभग एक ही रंग की है। फिर ज़करबर्ग की टीशर्ट और गेट्स का पैंट लगभग समान कलर वाला है। मतलब चंगू-मंगू की जोड़ी, जो भारत में मिल रही है मोटा सेठ से।

फिर सोचिए कि भारत से बड़ा बाजार तो चीन है। फिर वहां किसी टेलीकॉम ऑपरेटर या मोबाइल कम्पनी में ये पैसा क्यों नहीं लगा पाए? क्या चीन उनको ऐसा करने देगा? क्या चीन भारत है, जो फ्लिपकार्ट को अमेरिकी वालमार्ट के हाथों बिक जाने देगा? अमेरिकी अमेज़न तो पहले ही भारतीय बाजार में छाया हुआ है। कोला-पेप्सी, मैकडी और KFC जैसी अमरीकी कंपनियों के तो ढोंगी भारतीय मिडिल क्लास पहले ही दीवाने हैं। अब जब जियो के साथ जकरबर्ग और गेट्स की खिचड़ी पकेगी, तो इंडिया कहेगा ही कि I am loving it. पर सिर्फ इस बात से खुश मत होइए कि रिलायंस जियो, अमेरिकी कम्पनियों को नाच नचा रहा है। दरअसल जियो प्रतिस्पर्धा खत्म कर सकता है, जो बाजार में उपभोक्ता हित के लिए बहुत जरूरी है। जियो का सिमकार्ड आने के बाद जो हाल आइडिया, एयरसेल, वोडाफोन और एयरटेल का हुआ है, अगर वही हाल रिटेल, -कॉमर्स, इंटरनेट और अन्य सेक्टर्स में हो जाए, तब क्या होगा? यही कारण है कि फेसबुक वाले जकरबर्ग की जियो से हुई भारीभरकम डील की स्क्रुटनी fair trade regulator Competition Commission और TRAI कर सकता है कि क्या इससे इनकी बाजार पर मोनोपॉली तो नहीं होने जा रही। पर ठांढ रखिए। होना कुछ नहीं है। जियो सिम का कुछ बिग़ड़ा? एयरटेल और वोडाफोन सब चिल्लाते रहे और धीरे-धीरे उनकी दुकानें बंद हो गईं। यहां तक कि जियो ने अपने प्रमोशन के लिए देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी की तस्वीर का भी अपने विज्ञापन में इस्तेमाल कर लिया। क्या हुआ? कुछ सौ रुपये का मामूली जुर्माना लगाकर जियो को माफ कर दिया गया। हो गई ना दुनिया मुट्ठी में। छोड़िए, आगे बढ़ते हैं।

क्या है जकरबर्ग और जियो की डील


खबरों के मुताबिक जकरबर्ग की लॉटरी लग गई हैवह कई वर्षों से वह भारत के उभरते इंटरनेट और टेलिकॉम मार्केट में अपनी हिस्सेदारी चाह रहे थे क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मस जैसे फेसबुक और व्हाट्सअप के मार्फत उन्होंने दुनिया के एक बड़े यूजरबेस पर अपना कब्जा पहले ही जमा लिया हैऔर इसमें भी फेसबुक और व्हाट्सएप के सबसे ज्यादा यूजर भारत में हैंसो एक नादान भी समझ सकता है कि जहां ग्राहक, वहां जकरबर्गवैसे तो अंदरखाने जियो और फेसबुक की ये बातचीत काफी समय से चल रही थी पर कोरोना काल में डील फाइनल हो गई, ये भी एक बहुत बड़ा संकेत है कि आने वाले समय में इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोगों की निर्भरता किस कदर बढ़ने वाली हैकोरोना ने इसकी झलक दिखा दी है और 5G की आमद का सबको इंतजार हैइसके बाद तो इंटरनेट और हमारे आसपास की दुनिया वैसी नहीं रह जाएगी, जैसी अभी है


बहरहाल, हम बात कर रहे थे कि अरबपति जकरबर्ग और अरबपति मुकेश अंबानी के बीच हुई इस ऐतिहासिक डील में क्या हैइस डील के मुताबिक जकरबर्ग का फेसबुक, रिलायंस जियो प्लेटफॉर्मस में 43 हजार 574 करोड़ रुपया इन्वेस्ट करेगाबदले में फेसबुक को जियो में 9.99 फीसदी यानी लगभग 10 फीसदी की हिस्सेदारी मिल जाएगीफेसबुक के इस भारीभरकम निवेश के बाद जियो प्लेटफार्मस की बाजार में कीमत करीब 4.62 लाख करोड़ की हो जाएगी जो जियो जैसे बाजार में उतरे किसी भी नए-नवेले खिलाड़ी के लिए एक ही झटके में सबको साफ कर देने के समान हैमतलब हो गया बड़ा खेल, अब अंबानी जी मत बेचो तेल

Jio-Facebook डील के मायने


जैसा कि मैंने ऊपर बताया है कि दुनिया में जनता के डाटा के कारोबार वाले दो बड़े हाथी मिल रहे हैंसो उनकी चिंघाड़ जंगल के हर कोने में सुनाई दे रही हैइस डील से भारत के टेलिकॉम, इंटरनेट और E-Commerce सेक्टर में भूचाल गया हैजियो साल 2016 में भारत में आया और आते ही इसने इंटरनेट की दुनिया में क्रांति ला दीमुफ्त-सस्ते डाटा और अनलिमिटेड कॉल ने जियो के ग्राहकों की संख्या में बहुत कम समय में ऐसी बढ़ोतरी करी कि दुनिया दंग रह गईआज जियो के पास भारत में 38 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैंऔर सबने ऑनलाइन अपना-अपना आधार नम्बर देकर और अंगूठा लगाकर जियो का सिम खरीदा हैमतलब जियो के पास भारत की लगभग एक तिहाई आबादी का डेटा है और आज भी ये संख्या तेजी से बढ़ रही है। 


अब विदेशी जकरबर्ग की ताकत देखिएफेसबुक के पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा यूजर भारत में ही हैंअमेरिका से भी ज्यादाभारत में फेसबुक यूजर्स की तादाद 28 करोड़ है जबकि अमेरिका में सिर्फ 19 करोड़अब आते हैं Whatsapp की ताकत पेजकरबर्ग के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप के यूजर्स की भारत में तादाद 40 करोड़ हैयाना फेसबुक से भी ज्यादायानी फेसबुक और व्हाट्सएप की ताकत मिला दी जाए तो भारत की जनसंख्या का एक बहुत बड़ा हिस्सा जकरबर्ग की सेवाएं ले रहा हैअब इसमें मुकेश अंबानी वाले जियो के यूजर बेस की ताकत मिला दीजिए- 37 करोड़यानी इंटरनेट-सोशल मीडिया और टेलिकॉम के पूरे बाजार पर आधिपत्यइसके बाद कुछ बचता है क्या

लेकिन खेल सिर्फ इतना ही नहीं हैअसल खेल तो अब शुरु होता हैनए बाजार की तलाश का और उस पे कब्जे कासबसे पहले पढ़िए कि इस डील के बारे में जकरबर्ग ने क्या कहा है- “This is especially important right now, because small businesses are the core of every economy and they need our support. India has more than 60 million small businesses and millions of people rely on them for jobs. With communities around the world in lockdown, many of these entrepreneurs need digital tools they can rely on to find and communicate with customers and grow their businesses. his is something we can help with -- and that's why we're partnering with Jio to help people and businesses in India create new opportunities”.


वीडियो देखें और समझें कि जकरबर्ग क्या बोल रहे हैं

अब मतलब समझे आप? जकरबर्ग की योजना है कि जियो के साथ मिलकर भारत के करोड़ों छोटे कारोबारियों को डिजिटली ग्राहकों से जुड़ने की सुविधा देंयानी नीचे से ऊपर तक बाजार पर कब्जा-कॉमर्स पर भी क्योंकि तब फ्लिपकार्ट और अमेजन को इनके प्लेटफॉर्म से बड़ी टक्कर मिलेगीचीन का हाथी यानी अलीबाबा भी इसके बाद सतर्क हो गया है क्योंकि भारत में उसके सहयोग से चल रहा ईृकॉमर्स प्लेटफॉर्म बिग बास्केट को अब जियो-जकरबर्ग के मिलने से खतरा दिखने लगा हैअमेजन ने तो छोटे कारोबारियों को डिजिटल दुनिया में जोड़ने का जो प्लान Local Shops on Amazon बना रखा था, उसमें वह तेजी ला रहा है ताकि बाजार में पहले अपनी उपस्थिति दर्ज करा सके

यानी मोटे तौर पर हम देखें तो इस डील से भारत के टेलिकॉम सेक्टर से लेकर सोशल मीडिया, -कॉमर्स और किराना कारोबार तक बदल जाएंगेएक फोन आपकी सारी समस्याओं की कुंजी होगी और जकरबर्ग और जियो मिलकर आपका मार्गदर्शक बनने को बेकरार हैं

रिलायंस का अपना -कॉमर्स प्लेटफॉर्म


अभी तक तो ऊपर मैंने आपको रिलायंस के दूसरे प्लान बताए हैंअब आइए उस धंधे में जहां रिलायंस अपने बल बूते फ्लिपकार्ट और अमेजन को भारत में धोबी पछाड़ देने की जुगत में हैऔर खबर तो ये तक है कि इसमें Virtual Reality का सहारा लिया जाएगा यानी आप भविष्य में प्रॉडक्ट आभासी रूप से 3D में भी देख सकते हैंलेकिन मुकेब अंबानी यहां भी अकेले नहीं हैंजकरबर्ग का व्हाट्सअप उनकी मदद को पलक-पांवड़े बिछाए खड़ा हैरिलायंस ने अपने -कॉमर्स प्रोजेक्ट JioMart पर काम शुरु कर दिया है और इसमें उसने WhatsApp का साथ साझेदारी कर ली हैयानी फ्लिपकार्ट अमेजन को टक्कर देने के लिए जियोमार्ट के पास व्हाट्सएप का भी साथ होगा और रिटेल कारोबारी ग्राहक इस लोकप्रिय मेसेजिंग सर्विस के सहारे जियोमार्ट से भी जुड़ जाएंगे। 


और जियोमार्ट का धमाका ऑफर भी जियो मोबाइल सर्विस जैसा ही होगीयानी ऑर्डर के लिए कोई मिनिमम शॉपिंग क्राइटेरिया नहीं, रिफंड के लिए कोई सवाल नहीं, फ्री होम डिलिवरी और बम्पर डिस्काउंटयानी जियोमार्ट के पूरी तरह बाजार में आने के बाद आप फ्लिपकार्ट और अमेजन पर शॉपिंग भूल जाएंगेजियोमार्ट का कब्जा -कॉमर्स पर उसी तरह होगा, जिस तरह जियो ने फोन सेवा प्रदाता कम्पनी के रूप में एयरटेल और वोडाफोन को पछाड़ दियाइतना ही नहीं, जियोमार्ट सब्जी और अन्य घरेलू सामान बेचने वाले प्लेटफॉर्मस के लिए एक एग्रीगेटर के रूप में भी काम कर सकता हैयानी यह अलीबाबा जैसा कुछ-कुछ और फ्लिपकार्ट जैसा कुछ-कुछ होगा और इन दोनों से आगे की चीज होगा

बिल गेट्स की इंट्री


गुड़ को देखकर चीटिंयां आएंगी हीभारत के सबसे शक्तिशाली और सफल बिजनेसमैन मुकेश अंबानी के साथ हाथ मिलाने को बिल गेट्स की माइक्रोसॉफ्ट भी आतुर रही है और दोनों कम्पनियां पहले ही जियो प्लेटफॉर्मस के डाटा को लेकर एक समझौते में हैंमाइक्रोसॉफ्ट के क्लाउड प्लेटफॉर्म Azure के मार्फत माइक्रोसॉफ्ट जियो का डाटा अपने सर्वर पर संभाल कर रख रहा हैअब बिल गेट्स की माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक वाले जकरबर्ग से पीछे कैसे रह सकती है जियो में हिस्सेदारी खरीदने सेसो खबर है कि माइक्रोसॉफ्ट भी रिलायंस जियो में दो अरब डॉलर का निवेश करके 2.5 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने जा रही हैमाइक्रोसॉफ्ट सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा स्टोरेज आदि मामलों में दक्ष है, जिसका लाभ जियो को मिलेगा, अपने सारे प्लेटफॉर्मस परखासकर तब, जब वर्चुअल रियालिटी के माध्यम से जियोमार्ट और इसके दूसरे प्लेटफॉर्म पब्लिक को बांध लेंगे। 


मतलब साफ हैदुनिया के दो बड़े Giants यानी तकनीक की दुनिया के मास्टर्स, फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट जब रिलायंस जियो में हिस्सेदारी खरीदकर जुड़ेंगे, तो competitors यानी प्रतिद्वंद्वियों की सिट्टी-पिट्टी गुम होना तय हैरिलायंस की खासियत रही है कि वह शुरुआत में पानी की तरह पैसा बहाकर बाजार पर अपना आधिपत्य जमा लेता हैजियो भारत के भविष्य की एक नई इबारत लिख रहा है। लेकिन इस इबारत में गरीब आदमी के हिस्से क्या आएगा? ज्यादातर के पास तो उपभोक्ता बनने के भी पैसे नहीं हैं। बचा मिडिल और इलीट क्लास। सारी कवायद इन्हीं के लिए है। मार्क जकरबर्ग ने फ्री इंटरनेट के बहाने भारत के इस वर्ग पर भी आधिपत्य जमाने की कोशिश की थी लेकिन Net Neutrality के हल्ले में उनकी कोशिशों पर धूल पड़ गया। वहां भी इंटरनेट का इस्तेमाल सिर्फ अपनी सेवाओं को देने और देखने की योजना थी। अब तो जियो की पीठ पर सवार होकर जकरबर्ग और बिल गेट्स की भारत में ऑफिशियल इंट्री हो गई है। इब्तदा-ए-इश्क है, रोता है क्या, आगे-आगे देखिए होता है क्या !! 


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