आख़िर केजरीवाल को वोट देकर क्यों पछता रहे हैं दिल्ली के मुसलमान ?

त्वरित टिप्पणी


Nadim S. Akhter 1 June 2020


दिल्ली के जिन मुसलमानों ने #शाहीनबाग नहीं जाने वाले अरविंद केजरीवाल को थोक के भाव में वोट देकर उसे दुबारा सीएम बना दिया, आज वो अपनी करनी पे पछता रहे हैं, रो रहे हैं, सिर पीट रहे हैं, हाय-हाय कर रहे हैं।
दिल्ली में दंगों के नाम पे कई गिरफ्तारियां हुईं हैं, इनमें कितने अपराधी हैं और कितने आम नागरिक, ये केजू-टोपीलाल नहीं बता रहा। सीएम बनके तो ये भी कहने लगा है कि उसके पास तनख्वाह देने के भी पैसे नहीं बचे। दिल्ली के मुसलमान टोपीलाल में अपना मसीहा देखते थे, चुनाव जीतने के बाद टोपीलाल ने उनको टोपी भी पहनाई और पिछवाड़े पे लात भी मारी। अब पछता रहे हैं और टोपीलाल को गरिया रहे हैं। 


पुरानी फ़ोटो (साभार)


हमने पहले भी कहा था कि जो टोपीलाल शाहीबाग धरने के peak पे तुमसे मिलने नहीं आया, जो खुद धरना मास्टर है, वह चुनाव में वोट लेने के बाद तुमको दूध से मक्खी की तरह निकाल के फेंक देगा। तब ये लोग मुझे ही कोसने लगे थे कि मुझे राजनीति की समझ नहीं है। टोपीलाल एक प्लान के तहत नहीं रहा शाहीबाग, हमदर्दी जताने। हमने कहा कि तुम लोगों को हमदर्दी की ज़रूरत है या राजनीतिक समर्थन की, पहले ये तय कर लो। वे नहीं समझे। फिर टोपीलाल चुनाव जीत गया। लेकिन शाहीनबाग झांकने तक नहीं आया। सारे क्रांतिकारियों से तब अगर आप पूछ लेते कि उनका प्यारा केजू क्यों नहीं आया, अब तो चुनाव खत्म हुए, तो उनके चेहरे देखने लायक होते। वे किरन्तिकारी क्या थे, बच्चे थे, जो एक दिशाहीन शाहीबाग के आंदोलन की तथाकथित अगुवाई कर रहे थे। हमने तब भी कहा था कि बिना नेता का आंदोलन गड्ढे में ठहरा हुआ पानी है, जिसे जब चाहे झाड़ू से बुहार कर निकाल दिया जाएगा।

हुआ भी वही। रातोंरात दिल्ली पुलिस ने बुलडोजर लाकर शाहीनबाग के तंबू-टेंट उखाड़ दिए। स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के शब्दों में ज़मीन समतल कर दी। एक चिड़ीमार नहीं आया पुलिस को रोकने, जो इतने दिनों से वहां धरना देने और केंद्र सरकार की नींव हिलाने की खुशफहमी पाले हुए थे। पुलिस ने बड़े आराम से धरनास्थल से किरांति के निशान मिटा दिए। ना टोपीलाल ने कुछ कहा और ना बड़े-बड़े किरन्तिकारी सामने आए जो कल तक शाहीनबाग को protest का नाभिनाल बोलते नहीं अघाते थे। टोपीलाल तो खुद फर्जी किरान्ति करके सत्ता की कुर्सी पाए था, सो उसे पता था कि शाहीनबाग को कैसे भुनाना है और दिल्ली के मुसलमानों को कैसे ठगना है। उसने अपना काम आसानी से कर लिया। 

आज टोपीलाल सीम बन चुका है। मुसलमान लॉकडाउन में बिरयानी खाकर टोपीलाल को गरिया रहे हैं। उनका अब टोपीलाल से भरोसा उठ चुका है। कह रहे हैं कि सस्ती बिजली-पानी तो दूसरी पार्टी भी दे देती लेकिन केजू ने दगा दे दिया। हालाँकि बिजली-पानी को लेकर मैं किसी नेता को नहीं आंकता। नीयत देखता हूँ। किसी को नापने और आंकने का यही सबसे सटीक पैमाना है। कल पंडत नेहरू को ब्राह्मिन कहने वालों पे लिख दिया तो भाई लोगों को मिर्ची लग गई। हम तो नीयत देखते हैं भाई ! जब फ़ेसबुक जैसी खुली जगह पर आप जातिवाद कर सकते हैं और डंका बजाकर अपनी जाति का गिरोह बनाते हैं तो सोचिए कि ये लोग अपने दफ़्तर और समाज में जाति का कैसा ज़हर बोते होंगे?क्या-क्या खेल करते होंगे

बहरहाल, टोपीलाल ने एक बार फिर साबित किया कि इस देश में मुसलमान वोट बैंक के अलावा और कुछ नहीं। ना तो उनके पास कोई राजनीतिक समझ है, ना कोई दिशा दिखाने वाला और ना ही कोई अपना राजनीतिक इदारा, जहां से वह अपने मन की बात कह सके। हर बार वह अपनी पीड़ा बताने के लिए राजनीतिक पार्टियों की तरफ देखता है लेकिन सभी उसे आम की गुठली की तरह चूसकर फेंक देते हैं। 


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