Corona से निपटने में विफल भारत क्या Herd Immunity की तरफ बढ़ रहा है !

त्वरित टिप्पणी

Nadim S. Akhter 31 May 2020


चलो अब देश को #Herd #Immunity का ही सहारा है। #Lockdown5 की जगह अब #Unlock1 आ गया है। यानी देश खुल रहा है। घरों से बाहर निकलिए और अघोषित community transfer करके कोरोना फैलाइए।

पर सबसे बड़ा सवाल। जब आखिर में यही करना था तो ये चार-चार ताले लगा के देश को बंद करने की क्या ज़रूरत थी? इकोनॉमी का भट्ठा बैठा, वो अलग, मज़दूरों का पलायन हुआ वो थलग और देश में कोरोना केस 500 से बढ़कर पौने दो लाख को पार कर गए, वो करेले पे नीम चढ़ा। यानी सर्वनाश ही विनाश। 

तो क्या ये माना जाए कि कोरोना से निपटने में असफल होकर सरकार ने हाथ खड़े कर दिए और अब देश को उसके हाल पे छोड़ने का इरादा है? मरते हैं तो मरने दो, फिर अपने आप herd immunity तो बन ही जाएगी। लेकिन लेकिन


ये याद रखा जाए कि herd immunity पाने के लिए देश की करीब 75-80 फीसद आबादी को कोरोना से संक्रमित होना होगा। सो नेताजी के 135 करोड़ प्यारे देशवासियों में से करीब 1 अरब लोगों को इससे संक्रमित होना होगा। चूंकि कोरोना में मृत्यु दर भारत में 1-4 फीसद तक है, सो अगर मृत्यु का आंकड़ा एक फीसद भी रखें तो herd immunity पाने के लिए भारत में कम से कम एक करोड़ लोगों को मरना होगा। और अधिकतम 4-5 करोड़ लोग मरेंगे।

ये बहुत बड़ा आंकड़ा है। सरकार की चूलें हिल जाएंगी। इसलिए जो विद्वान वहां बैठ के ज्ञान बांच रहा है और देश को unlock करने का प्लान बना रहा है, उनको पता होना चाहिए कि आप टेस्ट करो या नहीं, अगर संक्रमण से लोग मरेंगे तो हल्ला हो ही जाएगा जो बहुत विकराल रूप ले सकता है। साफ दिख रहा है कि कोरोना को लेकर हमारी सरकार के पास कोई विज़न या दीर्घ नीति नहीं है। lockdown खत्म हो रहा है और अभी तक डॉक्टर्स के पास पीपीई किट और मास्क तक नहीं पहुंचे हैं। रोज खबरें आती हैं कि फलां जगह मास्क-किट नहीं होने के चलते डॉक्टर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अस्पताल वैसे ही जर्जर बने हुए हैं। रेलवे के जिन खाली कोचेस का इस्तेमाल कोरोना अस्पताल के रूप में होना था, अब फिर दुबारा पैसा खर्च करके उसे आम बोगी की शक्ल दी जा रही है। यानी पहले पब्लिक का पैसा रेलवे के कोचेस को अस्पताल बनाने में बर्बाद किया, पता नहीं ये सनक और आइडिया किसका था। और अब अनजान कारणों से उन कोचेस को अस्पताल से फिर आम रेल डिब्बे में रूपांतरित किया जा रहा है। दुबारा फिर पैसा खर्च करके। मतलब पब्लिक के पैसे की डबल बर्बादी। वो कहावत याद आ गई- माले मुफ्त, दिले बेरहम।

साफ है कि हमने lockdown के समय का उपयोग लॉकडाउन खोलने की तैयारियों के लिए नहीं किया। ये समझ से परे है कि जब विशेषज्ञ जून-जुलाई में देश में कोरोना के मामले बढ़ने की आंशका जता रहे हैं, रोज आंकड़े बढ़ रहे हैं और उम्मीद है कि मंगलवार तक कोरोना के मामले देश में दो लाख तक पहुंच जाएंगे, तो 

वैसे में हम Unlock हो रहे हैं यानी लॉकडाउन खोल रहे हैं। ये लॉजिक कम से कम मेरे गले तो नहीं उतर रहा। क्या आपके पल्ले कुछ पड़ रहा है?  इसी वजह से कह रहा हूं क्या सरकार ने अब कोरोना के सामने सरेंडर कर दिया है? क्या देश को Herd Immunity की तरफ बढ़ने को छोड़ दिया जा रहा है? अगर नहीं तो लॉकडाउन इस स्टेज पर खोलने के तो भयंकर नतीजे होंगे। अचानक से कोरोना के मामले रॉकेट की तरह ऊपर जाएंगे। तो क्या अब मौत भी महज आंकड़ा बनने जा रही है इस देश में। लगता तो ऐसे ही है। आप सावधानी बरतिए और अपनी जान-माल की हिफाजत खुद करिए। सरकार से मुझे तो उम्मीद दिख नहीं रही। आपको दिख रही हो, तो बेशक थाली बजाएं और दीया जलाएं।

धन्यवाद.

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