हर इंसान को लिखनी चाहिए अपनी Autobiography, नाती-पोते भी आप पे करेंगे गर्व

अच्छा हुआ जो स्वर्गीय ऋषि कपूर अपनी आत्मकथा लिख गए- खुल्लमखुल्ला। सारी बात दुनिया को बता गए। अगर आपने अपनी आत्मकथा नहीं लिखी या लिखवाई है, तो इसे कल से ही शुरू करिए। ज़िन्दगी मौका नहीं देती। कम से कम आपकी अगली पीढ़ी तो आपके और आपके राज़ व संघर्षों के बारे में जानेगी। उससे सबक लेगी।


मेरे पास एक-दो लोगों ने अपनी आत्मकथा लिखवाने का प्रोपोजल दिया था। मोटी फीस भी दे रहे थे। पर क्या सिर्फ पैसे के लिए किसी की आत्मकथा लिखी जानी चाहिए। कुछ inspiration और कहानी तो हो! ये क्या कि पैदा हुए, शादी की, बच्चे पाले और मर गए। आप बिल गेट्स भले ना हों पर माटी के ऐसे लाल हों कि आने वाली पीढियां आपसे प्रेरणा ले, तब तो बात बने। अगर मूड हुआ तो ऐसे ही प्रेरणादायक व्यक्तित्व पर जीवनी लिखी जा सकती है, बस एक शर्त है। आपको गीता और क़ुरआन पर हाथ रखकर कसम खानी होगी कि सच-सच बात बताएंगे। अगर गुणगान करवाना है तो फिर जीवनी मत लिखिए। अपना चालीसा लिख डालिए कि आप ही संसार में सिकन्दर थे। दूसरा तो कोई पैदा ही नहीं हुआ।

पर सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या जब कोई व्यक्ति अपनी जीवनी लिखता या लिखवाता है तो क्या वह सच के साथ आता है या कुछ बातों में अतिशयोक्ति कर देता है या झूठ भी बोलता है? इस का ठीक-ठीक कोई जवाब नहीं पर ये ज़रूर है कि आत्मकथा लिखते वक़्त इंसान अगर ख़ुद के प्रति ईमानदार रहा, तो वह अपने जीवन के अच्छे-बुरे कामों का लेखा-जोखा तो दे ही जाता है। ख़ासकर बुरे कर्मों का। और इसमें कुछ बुराई भी नहीं है। कुछ धर्मों में तो बाक़ायदा Confession या स्वीकारोक्ति की परम्परा रही है, ख़ासकर ईसाई धर्म में। यहाँ व्यक्ति चर्च जाकर भगवान के सामने या फिर धर्मगुरु के समक्ष अपनी ग़लतियों को बताता है, पश्चाताप करता है और भगवान से उसे माफ़ करने की विनती करता है। 



हालाँकि आत्मकथा में अपनी ग़लतियाँ बताना किसी माफ़ी के उद्देश्य से नहीं होता लेकिन ये ज़रूर होता है कि इंसान एक वक़्त के बाद अगर अपनी ग़लतियाँ क़ुबूल कर लेता है, तो वह कुछ हद तक मायामोह से ऊपर उठ जाता है। अगर आप मनोविज्ञान का अध्ययन करेंगे तो पाएँगे कि इंसान को अपनी गलती स्वीकार करने में ख़ुद के अंतर्मन से काफ़ी संघर्ष करना पड़ता है। बहुत जद्दोजहद होती है। सो अगर कोई सार्वजनिक रूप से अपनी गलती लिखकर मान रहा होता है, तो एक तरह से वह इंसान होने से ऊपर उठ रहा होता है। 

हमारे बापू यानी मोहनदास करमचंद गांधी ने भी अपनी ऑटोबायोग्राफ़ी लिखी थी- My experiments with Truth. इस किताब में गांधी जी ने अपने जीवन के उन पहलुओं पर भी बेबाकी से लिखा था, जिसपर वह आदमी कभी ना लिख पाए, जब वह महात्मा का दर्जा पा ले। लेकिन बापू तो बापू थे। उन्होंने सब लिख डाला। यही सब बातें बापू को महान बनाती हैं और ये बताती हैं कि बापू भी जानते थे कि वह भी इंसान ही थे। उनसे भी मानव स्वभाव के अनुरुप वो सब हुआ था, जो एक मनुष्य अपने जीवन में साधता है।


कल ऊपर के दो पैराग्राफ़ वाली पोस्ट पढ़कर कुछ मित्रों ने पूछा कि क्या वे अपनी जीवनी नहीं लिख सकते क्योंकि उनके जीवन में तो कुछ 'खास' घटित हुआ ही नहीं है! और मैंने ऊपर कह दिया है कि पैदा हुए, बच्चे पाले और मर गए, उस पर क्या लिखा जाए? पर ऐसा नहीं हैं। इस कुदरत में हर इंसान का जीवन अलग है। सबके अपने-अपने संघर्ष हैं। किसी का कम और किसी का ज़्यादा। आप बेशक एक रिक्शा चलाते हों, पर गाँव की जिस पृष्ठभूमि से उठकर आप शहर आए, जिस नज़र से शहर को देखा, यहाँ संघर्ष किया और फिर परिवार पाला, वह अपने आप में एक पूरी फ़िल्मी कहानी है। उस पर एक फ़िल्म बन सकती है, तो आत्मकथा क्यों नहीं लिखी जा सकती ? ज़रूर लिखी जा सकती है। उदाहरण के लिए आप अमिताभ बच्चन अभिनीत फ़िल्म कुली ही देख लीजिए। इसमें एक कुली की कहानी है, हालाँकि इसमें फैंटेसी है पर अगर सिर्फ़ एक कुली के जीवन पर एक रियलिस्टिक सिनेमा बनाना हो, तो वह भी बन सकता है। क्यों नहीं!!



सो लब्बोलुबाब ये है मित्रों कि आपका जीवन एकदम अद्वितीय है। उस जैसा किसी और का नहीं। तो उस पे आत्मकथा बनती है। पहले लोग रोज़ डायरी लिखते थे। शायद आज भी लिखते होंगे। अगर ऐसी अच्छी आदत आपकी भी रही है, तो आपकी तो लिखी-लिखाई आत्मकथा तैयार है। बस उसे कम्पाइल कीजिए, कुछ वैल्यू एडिशन करिए और छपवा दीजिए। अगर नहीं छपवा सकते तो डिजिटल माध्यम में कन्वर्ट करके सुरक्षित कर लीजिए। कम से कम आपके नाती-पोतों को तो पता रहेगा कि उनके नाना-दादा-दादी क्या थे और इस दुनिया में उन्होंने कैसे-कैसे संघर्ष किए! यक़ीन मानिए, उन्हें आप पर गर्व होगा। 

अगर बापू और ऋषि कपूर की ऑटोबायोग्राफ़ी के बारे में कुछ और जानना चाहते हैं, तो आप नीचे के लिंक पर क्लिक करके जान सकते हैं।

About Autobiography of Mohandas Karamchand Gandhi


Autobiography of Rishi Kapoor



About Bollywood film Coolie














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