देश में लॉकडाउन फिर बढ़ गया पर इसका असल ज़िम्मेदार कौन है ?

" फिलहाल तो आप सब घर पे रहें और ये सोचें कि अगर वक़्त रहते हमने ताइवान की सरकार की तरह ही यानी जनवरी के शुरू में ही, एयरपोर्ट पे स्क्रीनिंग कर दी होती, लोगों को वहीं क्वारन्टीन कर दिया होता, कोरोना वालों को देश में घुसने नहीं देते और ऊपर से नीचे तक सबको टाइट कर दिया होता तो आज सवा अरब की भारत की आबादी डेढ़ महीने से घरों में बंद नहीं होती" 


Nadim S. Akhter 1 May 2020


देश में lockdown 17 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है। लगता है सरकार अभी #HerdImmunity के रास्ते पे जाने के मूड में नहीं है। जैसा मैंने पिछली पोस्ट में भी लिखा था कि जून-जुलाई में भारत में कोरोना के पीक पर होने की भविष्यवाणी है, इसीलिए शायद सरकार कोई रिस्क नहीं ले रही। बहुत भारी आर्थिक कीमत चुकाकर। बात अब भी वहीं है। इधर कुआं, उधर खाई। सरकार करे तो क्या करे?




फिलहाल तो आप सब घर पे रहें और ये सोचें कि अगर वक़्त पे हमने, ताइवान की सरकार की तरह ही यानी जनवरी के शुरू में ही, एयरपोर्ट पे स्क्रीनिंग कर दी होती, लोगों को वहीं क्वारन्टीन कर दिया होता, कोरोना वालों को देश में घुसने नहीं देते और ऊपर से नीचे तक सबको टाइट कर दिया होता तो आज सवा अरब की भारत की आबादी डेढ़ महीने से घरों में बंद नहीं होती। देशभर में लाखों गरीब मज़दूर भुखमरी की हालत में नहीं होते। रोज़ कमाने-खाने वाला मिडिल क्लास घर बैठकर अपनी बचत-पूंजी खाने को मजबूर नहीं होता। पहले से ही हांफ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था क़ब्रिस्तान में ना पहुँच चुकी होती। राहुल गांधी को #RBI के पूर्व गवर्नर का इंटरव्यू ना लेना पड़ता, सरकार को अपरोक्ष रूप से ये सलाह देने के लिए कि क्या किया जाना चाहिए। 



एक मामले में मैं बहुत क्लियर हूँ। हम लोकतंत्र में सरकार बनाते हैं देश को चलाने का ज़िम्मा देने के लिए। इसमें मदद करने के लिए सरकार के मंत्रियों के पास एक लंबी-चौड़ी अफ़सरशाही होती है, हर मामले के विशेषज्ञ होते हैं और संविधान के आईने में विकास का एक पूरा खाका होता है। ख़ुफ़िया एजेंसियाँ देश को अंदरुनी और बाहरी ख़तरे से बचाने और आगाह करने का काम भी करती हैं। कहने का मतलब है कि सरकार के पास पूरा का पूरा एक तंत्र होता है, जिससे वह देश चलाता है। ऐसे में एक सवाल पूछूँ? जब हमारी सरकार के पास इतना सब कुछ होता है तो फिर देश में कोरोना वायरस कैसे घुस गया? कभी सोचा आपने? हवा में ख़ुद उड़कर आया या हवा में हवाई जहाज़ के मार्फ़त उसे इंसान, विदेशों से अपने देश में ले आया। इंसान ही लाया ना!

तो आपने कभी क्यों नहीं सोचा कि अगर ऐसा है तो फिर जहां हवाई जहाज़ उतरता है, उसी एयरपोर्ट को ही सील कर देते! जो आदमी विदेश से वहाँ उतरता, पहले १४ दिन क्वारंटीन में रहता, फिर स्वस्थ होता, तभी देश के अंदर उसे घुसने दिया जाता ! 



भारत में कोरोना का वायरस लापरवाही के चलते घुसा। और ऐसा नहीं है कि देश में एयरपोर्ट पर क्वारंटीन के उपाय पहले से नहीं हैं। ऐसी व्यवस्था कई सालों से हमारे देश में चली आ रही है। एक सच्ची घटना बताकर आपको समझाता हूँ। मेरे एक मित्र डॉक्टर हैं और एक दशक पहले वह नाईजीरिया में नौकरी करते थे। उस दौरान अफ़्रीका में पीला बुख़ार संक्रामक रोग था। जब वह नाईजीरिया से मुंबई आए तो एयरपोर्ट पर उनको अधिकारियों ने रोक लिया। कहा कि आपकी फ़्लाइट कीनिया होकर आई है और वहाँ संक्रामक पीले बुख़ार का प्रकोप है, सो कोई वैक्सीन वग़ैरह आपने लगवाई थी वहाँ? मेरे डॉक्टर मित्र ने बताया कि कुछ ही घटों के लिए कीनिया में उनकी फ़्लाइट रुकी थी। सो वैक्सीन की क्या ज़रूरत? पर भारतीय अधिकारियों ने कहा कि नहीं, आपकी फ़्लाइट तीन घंटे से ज़्यादा वहाँ रुकी, सो आपको क्वारंटीन में रहना पड़ेगा भारत में। आपके रहने की व्यवस्था हम कर देते हैं। अगर पीला बुख़ार आपमें नहीं निकला, तब देश के अंदर घुसने देंगे। फिर मेरे मित्र को क्वारंटीन किया गया, वह स्वस्थ निकले, तब जाकर उनको भारत में घुसने दिया गया।

कहने का मतलब ये है कि हमारे देश में संक्रामक रोगों की देश में एंट्री रोकने के इंतज़ाम वर्षों से हैं, पूरी व्यवस्था है, अफ़सर ट्रेन्ड हैं, फिर ये कोरोना देश में कैसे घुसा? फ़रवरी महीने में गुजरात में नमस्ते ट्रंप का जो प्रोग्राम हुआ, और जिसमें लाख की भीड़ जुटी, कई विदेशी आए, क्या उनका कोरोना टेस्ट एयरपोर्ट पर हुआ था? नहीं हुआ था ना! जबकि उस समय तक चीन में लॉकडाउन चल रहा था और ताइवान जैसा छोटा मुल्क अपने यहाँ एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग बढ़ा चुका था और बाहर से आने वालों को क्वारंटीन कर रहा था। फिर कोरोना के मामले में संबंधित एजेंसियों ने ये लापरवाही क्यों और कैसे की? ये लाख टके का सवाल है।  

एक होता है मूर्ख होना और एक होता है जानकर भी अनजान बनना। कहीं ऐसा तो नहीं कि आप सबकुछ जानते हैं, फिर भी जानबूझकर अनजान बनकर कोरोना फैलाने का दोष जमातियों पे मढ़ के बालू में मुंडी घुसाकर सो जा रहे हैं? अगर ऐसा है तो ये देश आपको कभी माफ़ नहीं करेगा। हम करें तो करें क्या और बोलें तो बोलें क्या?????

हमारे प्रधानमंत्री को उन लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करनी चाहिए, जिन्होंने समय रहते कारगर कदम नहीं उठाए और पीएम को वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं कराया। आज उसी का नतीजा देश भुगत रहा है।


नोट- अगर आप ये जानना चाहते हैं कि ३ मई को लॉकडाउन खुलने के बारे में पिछले दिनों मैंने क्या लिखा था, तो नीचे के लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं। 

www.nadimkibaat.com/2020/04/3.html   (तो ३ मई के बाद खुल जाएगा लॉकडाउन !)














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