आख़िर अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ क्यों बोलते रहते हैं सुब्रमण्यम स्वामी !

 " यह विपक्ष का भी हिस्सा हड़पने का खेल है। मतलब अगर सरकार को लगे कि गलती हो गई या पब्लिक में थू-थू हो रही है या विपक्ष जनता में क्रेडिबिलिटी बना रहा है तो तुरंत अपने ही एक आदमी को आगे कर दो, जो सरकार की 'कड़ी निंदा' कर दे "

Nadim S. Akhter 5 May 2020


गेम समझिए। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद श्री सुब्रमण्यम स्वामी ने मज़दूरों से ट्रेन का किराया वसूलने के मामले में मोदी सरकार पर हमला बोल दिया। स्वामी बोले कि भूखे मज़दूरों से किराया वसूलना एक मूर्खतापूर्ण फ़ैसला है। अगर विदेश में फँसे (या छुपे?) भारतीयों को हवाई जहाज़ से सरकार मुफ़्त देश ला सकती है, तो फिर इन मज़दूरों से क्यों किराया वसूला गया? अगर रेलवे किराए का बोझ वहन करने में सक्षम नहीं तो फिर PM Cares Fund किसलिए है?


Subramaniyan Swami is old BJP veteran who wants to become finance minister but he is ignored in the party

तो कुछ समझे आप? सुब्रमण्यम स्वामी अपनी ही सरकार पर हमलावर हो गए। आप सोच रहे होंगे कि कित्ती अच्छी लोकतांत्रिक पार्टी है। पार्टी के ही लोग सरकार की आलोचना कर रहे हैं। पर गच्चा मत खाइए। यह विपक्ष का भी हिस्सा हड़पने का खेल है। मतलब अगर सरकार को लगे कि गलती हो गई या पब्लिक में थू-थू हो रही है या विपक्ष जनता में क्रेडिबिलिटी बना रहा है तो तुरंत अपने ही एक आदमी को आगे कर दो, जो सरकार की 'कड़ी निंदा' कर दे। इसके बहुत फ़ायदे हैं।



एक तो इससे जनता का ध्यान तुरंत सरकार की गलती से डाइवर्ट हो जाता है और वह विपक्ष की बात सुनने की बजाय राज कर रही पार्टी के उस चेहरे की तरफ देखने लगता है, जो सरकार को कोस रहा होता है। यानी मीडिया से लेकर जनमानस तक विपक्ष जो स्पेस बना सकता था, जो अपनी छाप छोड़ सकता था, वह भी मत होने दो। वह स्पेस भी ख़ुद हड़प लो। 




इसका दूसरा फ़ायदा ये है कि जनता में इससे ये मैसेज चला जाता है कि हाय रे हाय ! कितनी लोकतांत्रिक सरकार है। स्वामी जैसा नेता तक सरकार की कड़ी निंदा किए दे रहा है और सब सुन रहे हैं। सदके जावां। इस अदा पर। जैसा मैं हमेशा कहता रहता हूँ कि जनता तो है ही भेड़ों का झुंड। वह बहुत आसानी से ऐसी थ्योरीज के झाँसे में आ जाती है। बाक़ी का काम आईटी सेल कर देता है कि देखो, आपकी सरकार कितनी सहनशील है। अपना ही नेता आड़े हाथों ले रहा है, फिर भी ये टुकड़े-टुकड़े गैंग और तथाकथित सिक-कुलरवादी कहता फिरता है कि ये सरकार तो आलोचना बर्दाश्त ही नहीं कर पाती है। देखो, अपने स्वामी जी को। चौड़े होकर आलोचना कर रहे हैं और पार्टी में बने हुए हैं। ना सरकार उनको तलब कर रही है और ना पार्टी अध्यक्ष। फिर भी ये लिबरल गैंग चोंच लड़ाता रहता है। और क्या चाहिए भाई लोगों !!

आप क्रोनोलॉजी समझिए। जब-जब सरकार की नीतियों या फ़ैसलों से जनता में उसकी आलोचना होने की आशंका रहती है तो स्वामी जी फट से कोई ऐसा ट्वीट कर देते हैं कि विपक्ष क्या हमलावर होगा गुरु ! लो हमीं बोल दे रहे हैं। रेलवे द्वारा मज़दूरों की घर वापसी पर जब किराया वसूलने की ख़बरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं और इस बात के सबूत दिखने लगे कि सरकार ने किराया वसूला है तो सरकार को किरकिरी से बचने के लिए तुरंत सुब्रमण्यम स्वामी आगे आ गए। अब कांग्रेस की कामचलाऊ अध्यक्ष सोनिया गांधी की कौन सुने, जिन्होंने भी जोश में ऐलान कर डाला कि मज़दूरों के घर आने का किराया कांग्रेस पार्टी देगी। हालाँकि कांग्रेस समर्थकों ने इस ख़बर को खूब हवा दी और कुछ मीडिया संस्थानों ने भी इसे छापा-दिखाया पर महफ़िल तो स्वामी जी लूट ले गए। ट्विटर पर भी और मेनस्ट्रीम मीडिया पर भी। 




यानी हुआ ये कि सरकार पर विपक्ष के हमले की धार स्वामी जी ने कुंद कर दी। लो, अपना ही आदमी सरकार को घेर रहा है भाई ! अब सोनिया जी ने बोल दिया तो क्या कमाल कर दिया। इसके बाद फिर सरकार भी डैमेज कंट्रोल करती है। कभी ख़बर आती है कि किराया तो लिया ही नहीं गया, फिर ये कि इतना फ़ीसदी किराया ख़ुद रेलवे दे रहा है, हम तो मज़दूरों के हितैषी हैं वग़ैरह-वगैरह। यानी एक साथ अलग-अलग एंगल से इतनी ख़बरें फैला दो कि पब्लिक भी कन्फ्यूज हो जाए कि भैया !! ये किराया कहीं मंगल ग्रह के प्राणी तो नहीं भर रहे !! और विपक्ष ने जो हमला किया, वह स्वामी जी ने पहले ही रोक दिया। लब्बोलुबाब ये कि जनता उकताकर इस ख़बर को ही भूल जाए कि जाने दो बे ! समझ ही नहीं आ रहा कि सोनिया गांधी काहे पगलाए हुए है और ये मजदूरवा सब काहे किचकिचा रहे हैं ? सरकार तो ट्रेन चलवाइए रही है ना ! किरायो ते देबे कर रही है। सब पॉलिटिक्स है...और इस तरह बहुत ही महीन तरीक़े से सरकार की गलती छिपा ली जाती है और साख बरकरार रखी जाती है। 

ऐसा नहीं कि अपने स्वामी जी पहली बार बीजेपी में रहते मोदी सरकार की आलोचना कर रहे हैं। बीच-बीच में यदा-कदा इनके अमृत बोल फूटते रहते हैं, जब भी सरकार की इमेज ख़राब होने की चिंता होने लगती है, स्वामी जी प्रकट हो जाते हैं। इससे पहले जब अर्थव्यवस्था सुस्ती के चरम पर थी, तब स्वामी जी ने खुलेआम सरकार की आलोचना कर दी थी। वे इतने पर ही नहीं रुके, RBI के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन की तारीफ भी कर दी और नसीहत दे डाली कि मोदी सरकार को उन्हीं के सुझाए रास्ते पर चलकर बेरोजगारी दर कम करनी चाहिए।

कहते हैं कि स्वामी जी देश के वित्त मंत्री बनना चाहते थे/हैं पर जब दाल नहीं गली तो समय-समय पर अपनी भड़ास सरकार की निंदा करके निकालते रहते हैं। अगर ऐसा है और वे बीजेपी से इतने ही नाराज़ हैं तो अब तक तो उनको पार्टी छोड़ देना चाहिए था ! कमाल की बात ये है कि दिल्ली दंगों जैसे हालात पर स्वामी जी अपनी पार्टी या सरकार की नहीं, ब्यूरोक्रेट्स की आलोचना करने लगते हैं। दिल्ली दंगों के समय उन्होंने कहा था कि चापलूस और Anti-Hindutva माइंडसेट वाले नौकरशाह की वजह से ही सारी परेशानी है और हमें Anti CAA प्रोटेस्ट के खड़े होने से सीख लेनी चाहिए। तब इस विवाद में उन्होंने एनसीपी प्रमुख शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले को भी घसीट लिया था। 


इतना ही नहीं, Vice News को दिए एक विस्फोटक इंटरव्यू में स्वामी जी ने ये तक कह दिया कि जहां भी मुसलमान ज्यादा तादाद में होते हैं, वहां समस्या होती है क्योंकि इस्लामिक आइडियोलॉजी ऐसा कहती है। मतलब दंगों को रोकने में सरकार और पुलिस की कोई जिम्मेदारी नहीं। असल समस्या मुसलमान हैं? यानी एक तीर से दो शिकार। एक तो इस तरह की बयानबाजी से साम्प्रदायिक उन्माद भड़का दो और दूसरी तरफ राज्य के कर्तव्यों पर सवाल उठाने वालों का मुंह बंद कर दो कि ये तो मुसलमान कर रहे हैं, राज्य क्या करे ??




साफ़ है कि सरकार के अलग-अलग संकट के समय स्वामी जी अलग-अलग भूमिका में रहते हैं। जब जहां, जो सधा, उसपे निशाना लगाकर सरकार की इमेज ठीक कर दो, उनका यही काम है। दिल्ली दंगों के लिए अफ़सरशाही ज़िम्मेदार हो गई, मुसलमानों को क़सूरवार ठहरा दिया और अब रेलवे भाड़ा वसूलने पे सरकार की थोड़ी आलोचना कर दी ताकि विपक्ष का स्पेस भी बीजेपी के पास ही रह जाए। स्वामी जी के इस भोलेपन पर कौन ना मर जाए? इसीलिए कहता हूँ कि राजनीति बहुत महीन चीज है। जो दिखता है, वो अंदर से होता नहीं।


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#ViceNews को दिए स्वामी के इंटरव्यू पर एक आलेख, जिसमें स्वामी ने मुसलमानों को असल समस्या कहा था

https://gulfnews.com/opinion/op-eds/subramanian-swamys-problem-with-indian-muslims-1.70889164

स्वामी ने की मोदी सरकार की आलोचना, कहा सरकार सही आर्थिक फ़ैसले नहीं ले रही

https://www.financialexpress.com/india-news/govt-is-not-following-right-economic-policies-subramanian-swamy/1720691/



स्वामी ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल

https://www.jansatta.com/business/bjp-leader-subramanian-swamy-criticize-modi-government-business-policy-unemployment-rate/1166925/

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