High Moral Ground लेने से पहले नीचे जमीन भी देख लो, खिसक तो नहीं रही !

चक्रव्यूह

Nadim S. Akhter 31 May 2020

कुछ लोग तुरन्त high moral ground लेने लगते हैं। ऐसे लोगों को ये बताना चाहता हूँ कि अगर विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण भी महाभारत के युद्ध में मोरल ग्राउंड को ऊपर रख लेते ना, तो अश्वत्थामा के मरने की fake news ना फैलाई गई होती और गुरु द्रोण कभी नहीं मारे जाते। वे अकेले पांचों पांडवों की चटनी बनाकर रख देते और भगवान कृष्ण बंसी बजाते रहते। 



और अगर विष्णु के ही अवतार भगवान राम ने मोरल और ग्राउंड को उच्च कर दिया होता ना तो सुग्रीव का भाई वानरराज बाली कभी नहीं मारा जाता। और ना रावण का वध हो पाता क्योंकि विभीषण से वो पता ही नहीं लगवाते कि रावण के अमर होने वाला अमृत उसके शरीर में किधर छिपा हुआ है। दुश्मन के भ्राता से अमृत का पता पूछूँ? तौबा, तौबा, तौबा!

और अगर हमारे आदरणीय पीएम श्री नरेन्द्र मोदी जी ने नैतिक धरातल को संसद में ऊंचा कर दिया होता ना तो पप्पू राहुल गांधी जिस क्षण उनसे जाकर गले मिले थे, उसी क्षण मोदी जी को भी गले मिलने के लिए उठकर खड़ा होना पड़ता। तब पप्पू की जगहंसाई होती क्या? नहीं होती ना! वो तो अटल बिहारी वाजपेयी जी ने नैतिक मानदंड ऊंचा कर दिया और दुश्मन देश पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से सार्क सम्मेलन में उस वक़्त हाथ मिलाने उठ खड़े हुए, जब मुशर्रफ कुटिल नीति से अचानक उनकी तरफ बढ़कर हाथ मिलाने गया।

सो जब धर्म, नीति-शास्त्र और राजनीति का ज्ञान ना हो तो high moral ground लेने की बात नहीं करनी चाहिए। एक नेता जब सरेआम ट्विटर पर आकर झूठ बोलता है, fake news फैलाता है, तब वह कौन सा हाई मोरल ज़मीन ले रहा होता है? गोली मारो सालों को नारा जब लगता है और दंगों में पुलिस के सामने एक समुदाय को जब धमकाया जाता है तो कौन उच्च राजनैतिक-नैतिक मापदंड बना-बता रहा होता है।

इसलिए ज्यादा ज्ञान ना पेलिये। उच्च धरातल की ज़मीन हमें भी दिखती है और वहाँ खेती भी करता रहता हूँ। पर जब बाढ़ आ जाए तो पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है,  ज़मीन पर जान जाने का ख़तरा रहता है। अगर मेरी बात समझ आ गई हो, तो ठीक, वरना मस्त रहिए। जय हो !!

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