"अल्लाह चाहे तो कोरोना वायरस को वापिस बुला लेगा"

चक्रव्यूह


Nadim S. Akhter 9 June 2020


कल बातों ही बातों में एक बुज़ुर्ग ने कहा- "अल्लाह चाहे तो कोरोना वायरस को वापिस बुला लेगा"।


उनकी बात सुनकर सोच में पड़ गया। कोई जवाब नहीं दे सका। पल भर में विज्ञान, ज्ञान, धर्म और ईश्वर का सारा ज्ञात अनुभव मेरे दिमाग की तंत्रिकाओं में बिजली की तेजी से घूम गया पर उस बुज़ुर्ग की बात को प्रोसेस करके मेरा दिमाग कोई जवाब तैयार नहीं कर सका। मैं चुप रहा।

फिर बाद में बहुत देर तक मंथन करता रहा। सारे if and but लगा लिए। फिर इस नतीजे पे पहुंचा की अगर आप आस्तिक हैं और ईश्वर की सत्ता में यकीन करते हैं तो वाकई ऐसा हो सकता है। ईश्वर चाहे तो कोरोना वायरस सचमुच दुनिया से गायब हो सकता है। जब सब कुछ उसी ने बनाया और गढ़ा है और हर शय उसी के हुक्म की गुलाम है, धरती से लेकर अम्बर तक, हर चीज़ उसी का हुक्म मानती है और जब खुदा क़ुरआन में कहता है कि क़यामत के दिन ज़मीन को हुक्म होगा कि वह हर चीज़ उलट-पलट दे और वो सबकुछ अपने अंदर से निकाल दे, जो उसके पेट में दबे पड़े हैं....तो एक आस्तिक को इसका मतलब समझ जाना चाहिए। 

सूरह रहमान में सर्वशक्तिमान अल्लाह जो कहते हैं, उसका मोटामोटी अनुवाद है-- हमने सूरज और चांद को बनाकर एक precise calculation से चलने के लिए छोड़ दिया। फिर हमने ज़मीन बनाई, मिट्टी से इंसान बनाया और धुआं रहित आग से जिन्न को। दो सूर्योदय और दो सूर्यास्तों का मैं ही स्वामी हूँ। हमने दो समुंदर बनाए। बिल्कुल एक दूसरे के बगल में। और फिर उनके बीच में एक barrier बना दिया ताकि दोनों समुंदर का पानी आपस में कभी मिक्स नहीं हो पाए। इस धरती पे जो भी चीज़ पैदा हुई है, एक दिन उसका नष्ट होना तय है। सो इंसानों, तुम बताओ! अपने रब की दी हुई किन-किन नेमतों से तुम इनकार करते रहोगे?

फिर क़ुरआन में एक जगह अल्लाह कहते हैं कि हमने सारी कायनात को बनाने से 50 हज़ार साल पहले सबसे पहले कलम बनाई और उसे हुक्म दिया कि -लिख। वो सब कुछ लिख जो बनने वाली इस पूरी कायनात में होगा। एक पत्ता किस रंग का खिलेगा, वह कब मुरझायेगा, फिर कब पेड़ की शाख से नीचे गिरेगा, कब सड़ेगा और कब ज़मीन में मिल जाएगा...हर कुछ। एटम से लेकर तारों-सितारों तक का हश्र इस किताब में लिख दिया। इसी किताब को लौहे-महफूज़ कहते हैं, जिसका access फरिश्तों को भी नहीं। यही इस यूनिवर्स की Master Book है। 

इतनी सारी जानकारी मेरे दिमाग में प्रोसेस होने के बाद इसी नतीजे पे पहुंचा कि जब सर्वशक्तिमान ईश्वर ने सब कुछ पहले लिख दिया है कि क्या-क्या होना है, वायरस, बैक्टीरिया से लेकर गैलेक्सी और ब्रह्मांड तक का हश्र पहले ही तय हो चुका है तो ये वायरस कोरोना भी अपने अंजाम तक पहुंचेगा ही पहुंचेगा। बस हमें अभी ये नहीं मालूम कि वो अंजाम क्या है?

इसलिए बुज़ुर्ग की ये बात बिल्कुल ठीक थी कि अल्लाह चाहेगा, तो इस कोरोना को वापिस बुला लेगा। इसलिए कि क़ुरआन में अल्लाह कहते हैं कि ऐ इंसानों! दुआ करो क्योंकि सिर्फ दुआ ही एक ऐसी ताक़त हमने इंसानों को दी है ( फरिश्तों को भी नहीं), जिससे मैं अपना लिखा हुआ बदल देता हूँ। सो मुझसे मांगो। जितनी शिद्दत से मांगोगे, दुआ उतनी जल्दी क़ुबूल होगी।

इसलिए दुनियाभर के आस्तिक अगर मिलकर दुआ मांगेंगे तो ये कोरोना नामक बला का जो हश्र उस सर्वशक्तिमान ने निर्धारित कर रखा है, आपकी दुआ/प्रार्थना की बरकत से उसे बदल सकता है। यानी खुदा चाहे तो कोरोना वायरस को वापिस बुला सकता है, बहुत जल्द उसे दुनिया से हटने का हुक्म दे सकता है। सारा विज्ञान और ज्ञान यहां फेल है क्योंकि उसी की बनाई चीज़ को समझने का प्रयास करके हम उसे विज्ञान का नाम देते हैं। और आज तक हमारा उन्नत विज्ञान यही नहीं समझ पा रहा कि ये कोरोना वायरस कहाँ और कदर mutate कर रहा है? एक स्ट्रेन की वैक्सीन बनेगी तब तक दूसरा स्ट्रेन आ जाएगा। कब तक और कैसे लड़ोगे इस वायरस से? विज्ञान ने हथियार डाल दिए हैं। एक सूक्ष्म वायरस के सामने, जो आंख से दिखता तक नहीं।

समझदार लोगों के लिए ये एक इशारा है, उस सत्ता की तरफ देखने का, जो इस कायनात का रचियता है। इसलिए जिसने इस वायरस को बनाया है, वह अगर चाहे तो इसे वापिस अपनी जगह चले जाने का हुक्म भी दे सकता है । कि अब बहुत हुआ। अब मेरे मख़लूकों में सबसे अशरफ, सबसे आला, इंसानों को परेशान मत करो। हमने इंसानों की जात इस पूरी क़ुदरत में सबसे आला बनाई है क्योंकि अपने सारे नबी और पैगम्बर इंसानों की ही नस्ल में भेजी है। ना फरिश्तों की नस्ल को भेजी और ना जिन्नातों की नस्ल को।


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