इंसान में भगवान ढूँढने से पहले जरा Universe के Dark Matter का भी पता लगा लो !

त्वरित टिप्पणी


Nadim S. Akhter 5 June 2020


मेरी मित्र सूची में जो लोग किसी तथाकथित बाबा, संत, औघड़, पंडत, भगवान, दयावान, पहलवान, मौलाना, शेख, चिश्ती, वली, माता, मम्मी, जीसस के अवतार, भगवान के अवतार और फिर सीधे मनुष्य रूप धरे किसी भगवान के चेले, चपाटे, भक्त, शिष्य, मुरीद, सेवक, नौकर और फलां-ढिमका हों

वो खुद को पहले ही अमित्र यानी unfriend कर लें। या फिर जिस दिन मेरी नज़र पड़ी तो मैं ही उन्हें मंगल ग्रह भेजने का कष्ट करूंगा। अभी एक ऐसे ही दुखी आत्मा को मंगल ग्रह प्रस्थान कराया। वो किसी ज़िंदा बाबा के ज़रिए मोक्ष प्राप्ति को आतुर थे और बाबा संग बिताए लम्हों को फेसबुक पे शेयर करके आधा स्वर्ग इसी धरती पे पा गए थे।


इस देश में लालची टीवी न्यूज चैनलों के मालिकों ने निर्मल बाबा से लेकर दाती महाराज और ना जाने कितने फर्जी बाबाओं को जन्म दिया और उनकी लाल किताब बेचवाकर खुद मोटा माल कूट के बमबम लाल हो गए। बाकी बाबा और संत-फकीर-वली तक भाई लोग सुन-सुना कर पहुंच जाते हैं, जहां कभी भूत उतारने के नाम पे किसी महिला का रेप हो जाता है तो कहीं आश्रम के नाम पे किसी गरीब की ज़मीन हड़प ली जाती है।

और कुछ इंसान आज के युग में इतने महान पैदा हुए हैं कि खुद को ही भगवान घोषित कर दिया और हज़ारों की तादाद में विदेशी चेले बनाकर खूब धन कमाया, विलासिता का जीवन जिया और मरने के बाद भी अपने नाम का एक सम्प्रदाय छोड़ गए। सत्य साईं बाबा से लेकर ओशो रजनीश तक। इन सबने खूब ज्ञान दिया, ऐसा ज्ञान, मानो दुनिया इनके पहले पूरा पाषाण काल में जी रही थी और पृथ्वीवासी मंगल ग्रह के देवताओं की पूजा-अर्चना कर रहे थे। फिर मनुष्य का वेश धरे ये भगवान खुद धरती पे अवतरित हुए इंसानों को बताया कि अंधकार युग से निकलो। सत्य और प्रकाश का मार्ग ये है। कमाल है! जनता भी निपट मूर्ख है, जो इन लोगों के झांसे में जाती है। हर धर्म में यही हाल है और अनेकों फर्जी बाबा रोज़ पैदा हो रहे हैं।

पिछले दिनों फेसबुक ने रोज़ मुझे एक अफ्रीकी काले नए-नवेले Prophet का live प्रवचन सुनाना शुरू किया। मेरी वॉल पे रोज़ दिख जाए। पता चला कि फेसबुक को मोटा पैसा देकर ये दुनिया भर में live हो रहा था और अपनी marketing कर रहा था। उस हब्शी को मैंने 10 मिनट तक ध्यान से सुना कि देखें पब्लिक को कैसे मूर्ख बना रहा है। पता चला कि वह जीवन का आनंद लेने का ज्ञान दे रहा था। वही कूटियापा, जो ओशो रजनीश से लेकर तमाम लोग दे चुके हैं। पब्लिक भी live comment करके उस नवीन भगवान पे फिदा हुए जा रही थी। इन चिरकुटों से कोई पूछे कि जीवन का इतना ही आनंद लेना था, तो गौतम बुद्ध तो निरे मूर्ख थे। जीवन के दुख देखकर ही राजपाट और राजमहल छोड़कर जंगल-जंगल भटकते रहे। और भगवान को जान लेना इतना आसान है? बिगबैंग से पहले जब कुछ नहीं था, तब भी वो था। और इंसान चूंकि भगवान को जान नहीं पाता, कमज़ोर है, इसलिए वह अलग-अलग मज़हबों में विभिन्न तरीके से उसकी वंदना करता है, अपने दुख और विपत्तियों में भगवान का सहारा ढूंढता है।

पर ये फर्जी बाबा या तो खुद भगवान बनने का ढोंग करते हैं या फिर अपनी ताकत से अपने मूर्ख भक्तों के दुख दूर करने का स्वांग करते हैं। गाय को हरी चटनी खिलाने से और बीवी को लाल साड़ी पहनाने से कृपा ज़रूर आएगी। अब बाबा ने बोल दिया है तो जाएगी। बहुत दिनों से रुकी हुई थी।
लेकिन कृपा करके ऐसे लोग मेरी जान छोड़ें। मुझे बहुत कोफ्त होती है इनको देखकर। सत्य का दर्शन आप खुद कर सकते हैं।उसके लिए लौ लगानी होगी। बिना किसी आडम्बर के। और फिर सत्य का जो रूप आप देखेंगे, उसमें भी कई गिरह होंगे। एक खोलेंगे, तो दूसरा छूट जाएगा। इस मायाजाल में हमारी औकात एककोशिकीय अमीबा की भी नहीं है और चले हैं सत्य का दर्शन करने। पहले भी लिखा था कि यहां सूक्ष्मतम ही वृहद है। यानी एक एटम में इतनी ऊर्जा है कि वह पहाड़ के चीथड़े कर दे। और अब विज्ञान strange matter की बात करने लगा है। यानी ऐसा मैटर अर्थात तत्व, जिसमें एटम के अंदर खाली 99.99 फीसदी जगह खचाखच भरी हुई होती है और वह जिस भी चीज़ को छू लेता है, उसे अपने जैसा बना देता है। मतलब इस strange matter की एक बूंद भी अगर पृथ्वी के वायुमंडल में गयी तो पूरी पृथ्वी नष्ट हो जाएगी क्योंकि यहां मौजूद सभी चीजों के एटम तब स्ट्रेंज मैटर के एटम में तब्दील हो जाएंगे और फिर हवा, पानी से लेकर मिट्टी जीवन, सबकुछ एक नए नाभिकीय संरचना को प्राप्त होंगे, जिसके बारे में हम कुछ नहीं जानते, सिर्फ अंदाज़ा ही लगा रहे हैं।

और ये फर्जी बाबा भगवान बनकर ज्ञान देने में लगे हैं। सच है, जब तक धरती पे महामूर्ख रहेंगे, भगवान के नाम पे इंसान अपनी दुकानदारी चलाता रहेगा। भगवान को जान जाओगे, ये तुम्हारी औकात है क्या? एक सच को समझने का दावा करोगे तो सौ सच और सामने जाएंगे। कनफुजिया जाओगे कि सोचें कहाँ से और उसको स्टोर करके प्रोसेस कहाँ करें? अभी तो पैरेलल यूनिवर्स का नहीं जानते, ये नहीं समझ रहा कि वो कौन सा बल है, जिसके बूते यूनिवर्स लगातार फैल रहा है, डार्क मैटर का abcd नहीं जान पाए और ये तो सोच ही नहीं पाए कि बिग बैंग से पहले उस सूक्ष्म में ऐसा क्या था, जिसने ख़रबों-खरब प्रकाश वर्ष दूर फैले असीम ब्रह्मांड का निर्माण कर डाला? यानी एक सूक्ष्म जब हमारी कल्पना से परे वाला वृहद है तो उसके निर्माणकर्ता की कल्पना भी हम कैसे कर सकते हैं? ढोंगी बाबाओं के मूर्ख चेलों को जिस दिन ये समझ जाएगा, उस दिन उन्हें सबसे पहला एहसास ये होगा कि वे इंसान हैं, जिनके पास सोचने-समझने की मशीन, यानी दिमाग है। और अब तक वे अंधकारयुग में जी रहे थे, आज आंख खुली है।


धन्यवाद।


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